सरकार के पास न दृष्टि न नीति और न ही वित्तीय अनुशासन : विपिन सिंह परमार
धर्मशाला, 21 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान शासन हिमाचल प्रदेश को आर्थिक अराजकता और करों के बोझ तले कुचल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं को छिपाने के लिए जनता की जेब पर लगातार प्रहार कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में मित्र मंडली को पद और सुविधाएं बांटी जा रही हैं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से वाहनों की एंट्री फीस में की गई वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकार के पास न दृष्टि है, न नीति और न ही वित्तीय अनुशासन। हिमाचल जो अपनी आतिथ्य परंपरा और पर्यटन की पहचान के लिए जाना जाता है, वहां स्वागत द्वार पर ही शुल्क की दीवार खड़ी कर दी गई है। क्या यही विकास मॉडल है, क्या यही पर्यटन संवर्धन है।
विपिन सिंह परमार ने यहां जारी प्रेस बयान में कहा कि जब युवा बेरोजगार है, व्यापारी वर्ग मंदी की मार झेल रहा है, कर्मचारी और पेंशनर असुरक्षा में हैं—तब सरकार का समाधान केवल कर-वृद्धि क्यों बनता है। क्या शासन चलाने का अर्थ केवल शुल्क बढ़ाना और उत्तरदायित्व से बचना रह गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बार-बार केंद्र पर आरोप लगाकर अपनी अक्षमता छिपाने का प्रयास करती है, जबकि सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार हिमाचल के साथ मजबूती से खड़ी है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि सरकार ने वित्तीय संतुलन के लिए ठोस कदम उठाने के बजाय करों का सहारा लिया। शर्तों से बंधी सहायता को उपलब्धि बताकर जनता को भ्रमित करना बंद किया जाए। यदि खजाना खाली है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मित्र मंडली की नियुक्तियां, अनावश्यक राजनीतिक विस्तार और अपारदर्शी व्यय ही प्रदेश की आर्थिक बदहाली के वास्तविक कारण हैं। परमार ने मांग की है कि एंट्री फीस वृद्धि का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए, पर्यटन और उद्योग को राहत दी जाए और केंद्र से प्राप्त प्रत्येक रुपये का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

