दस गारंटियों का हिसाब नहीं, अब 11वीं गारंटी का शिगूफा छोड़ रही सुक्खू सरकार : बिक्रम ठाकुर
धर्मशाला, 16 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री एवं जसवां-परागपुर के विधायक बिक्रम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दस चुनावी गारंटियों को पूरा करने में विफल रही कांग्रेस सरकार अब नए जिलों के गठन की चर्चा के जरिए जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में नए जिले बनाने को लेकर गंभीर थी, तो सत्ता में आने के चार साल बाद ही इस विषय की याद क्यों आई?
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के मुद्दों को उठाना सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि नए जिलों का गठन अपने आप में गलत नहीं है। जिन क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या, दूरी और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर अलग जिले की मांग उठ रही है, वहां सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। लेकिन इसके लिए स्पष्ट नीति, ठोस आधार और समयबद्ध कार्ययोजना जरूरी है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश में नए जिलों के गठन की आवश्यकता का आकलन करने के लिए पिछले चार वर्षों में सरकार ने क्या कदम उठाए।
भाजपा विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश की जनता से अनेक वादे किए थे। महिलाओं को आर्थिक सहायता देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने और अन्य गारंटियों को पूरा करने के सवाल आज भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को नए वादों और घोषणाओं की चर्चा करने से पहले अपनी सरकार के अब तक के कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले ही वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए जिलों के गठन पर चर्चा करते समय सरकार को प्रशासनिक ढांचे के विस्तार, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती, कार्यालयों, भवनों और अन्य सुविधाओं पर होने वाले संभावित खर्च का आकलन भी सार्वजनिक करना चाहिए।
बिक्रम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह नए जिलों के गठन को लेकर सरकार की वास्तविक मंशा स्पष्ट करें और अब तक किए गए कार्यों का ब्यौरा सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

