कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय रक्षा कर्मियों हेतु चौथा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सम्पन्न

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कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय रक्षा कर्मियों हेतु चौथा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सम्पन्न


धर्मशाला, 27 मार्च (हि.स.)। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने “सब्जी एवं बागवानी फसलों की संरक्षित खेती एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर 16 सप्ताह का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण 8 दिसंबर, 2025 को प्रारंभ हुआ तथा शुक्रवार को प्रसार शिक्षा निदेशालय (डीईई) में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम महानिदेशालय पुनर्वास, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित था। प्रशिक्षण में भारतीय सेना के 14 तथा भारतीय नौसेना के 6 जवानों सहित कुल 20 रक्षा कर्मियों ने भाग लिया।

समापन समारोह में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मेजर प्रशांत यादव विशिष्ट अतिथि रहे।

डॉ. विनोद शर्मा ने प्रतिभागियों की लगन एवं सक्रिय भागीदारी की सराहना की तथा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस प्रकार के उपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अर्जित कौशल प्रतिभागियों को कृषि आधारित उद्यम स्थापित करने एवं स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में सहायक होंगे।

मेजर प्रशांत यादव ने भी विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से रक्षा कर्मियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त हुआ है, जो उनके सेवानिवृत्ति उपरांत जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

कुलपति डॉ. ए.के. पांडा ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती एवं मूल्य संवर्धन से उत्पादकता, लाभप्रदता तथा उद्यमिता के अवसरों में व्यापक वृद्धि संभव है, विशेषकर प्रशिक्षित रक्षा कर्मियों के लिए।

इससे पूर्व पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. लव भूषण ने प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं प्रमुख घटकों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की, जिसमें संरक्षित खेती की तकनीकों एवं मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया गया। वहीं डॉ. अंकुर शर्मा, जिन्होंने महानिदेशालय पुनर्वास एवं उत्तरी कमान, उधमपुर के साथ समन्वय स्थापित किया, ने इस प्रकार की समन्वित पहलों के महत्व पर प्रकाश डाला, जो रक्षा कर्मियों के कौशल विकास एवं नागरिक जीवन में सुगम परिवर्तन में सहायक हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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