अन्तर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक ने किया कृषि विश्वविद्यालय का दौरा

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अन्तर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक ने किया कृषि विश्वविद्यालय का दौरा


धर्मशाला, 02 सितंबर (हि.स.)। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में डॉ. पन्नीरसेल्वम पेरमैयन, परियोजना प्रमुख वैज्ञानिक (फसल प्रणाली कृषि विज्ञान), अन्तर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईआरआरआई-एसएआरसी), वाराणसी ने बुधवार को विश्वविद्यालय का दौरा किया। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय–अन्तर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान की सहयोगात्मक परियोजना के अंतर्गत चल रही अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा की।

यह सहयोगात्मक परियोजना वर्ष 2025 से जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग के अनुसंधान प्रक्षेत्र में संचालित की जा रही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती प्रणाली के अंतर्गत अनुसंधान, नवाचार तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में धान उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, यह परियोजना क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों, जैसे अनिश्चित मौसम की परिस्थितियों, मृदा उर्वरता से संबंधित समस्याओं तथा जल-कुशल कृषि तकनीकों की आवश्यकता को भी संबोधित करती है।

अपने दौरे के दौरान डॉ. पन्नीरसेल्वम पेरामैयन ने डॉ. जनार्दन सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक से भेंट कर विचार-विमर्श किया। इस दौरान प्रदेश में संचालित किए जा रहे अनुसंधान परीक्षणों एवं प्रदर्शनों में विद्यार्थियों की सहभागिता की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसके पश्चात डॉ. पन्नीरसेल्वम ने अनुसंधान प्रक्षेत्र में चल रहे विभिन्न अनुसंधान परीक्षणों का अवलोकन किया तथा खरीफ धान की फसल के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। उन्होंने परियोजना के क्रियान्वयन में संलग्न वैज्ञानिकों एवं अनुसंधान कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती आधारित धान उत्पादन प्रणालियों पर अनुसंधान को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरे से चल रही अनुसंधान गतिविधियों की तकनीकी समीक्षा का अवसर प्राप्त हुआ तथा हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए टिकाऊ, उत्पादक एवं पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित धान-आधारित फसल प्रणालियों के विकास की दिशा में कृषि विश्वविद्यालय एवं आईआरआरआई के बीच सहयोगात्मक प्रयासों को और सुदृढ़ करने में सहायता मिली।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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