लाहौल-स्पीति में राजमाश की खेती को बढ़ावा देने की कवायद, 4 हजार किस्मों का हो रहा मूल्यांकन
धर्मशाला, 05 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में राजमाश की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई किस्मों के परीक्षण का काम चल रहा है। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी में देशभर से एकत्रित राजमाश की करीब 4,000 उन्नत फसल पंक्तियों और किस्मों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी की ओर से जनजातीय उप-योजना के तहत राजमाश पर ‘खेत दिवस’ का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के करीब 100 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुभाष कुमार ने मुख्य अतिथि निदेशक अनुसंधान डॉ. विनोद कुमार शर्मा और अन्य वैज्ञानिकों की मौजूदगी में किया।
कार्यक्रम में एनबीपीजीआर-आईसीएआर, नई दिल्ली की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पद्मावती गणपत गोरे विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। किसानों को संबोधित करते हुए परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. राकेश छाहोटा ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से जुटाई गई राजमाश की लगभग 4,000 उन्नत फसल पंक्तियों और किस्मों को अनुसंधान केंद्र में परीक्षण के लिए रखा गया है।
उन्होंने बताया कि इन किस्मों का गहन परीक्षण और मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें से जो किस्में उत्पादन, गुणवत्ता और क्षेत्र की परिस्थितियों के लिहाज से बेहतर पाई जाएंगी, उन्हें भविष्य में स्थानीय किसानों के लिए खेती के उद्देश्य से उपलब्ध करवाया जाएगा।
पारंपरिक किस्मों के संरक्षण पर जोर
वैज्ञानिकों ने किसानों को राजमाश की पारंपरिक किस्मों के संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया। डॉ. पद्मावती गोरे ने बीज संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए किसानों से अपनी पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने और उनके मूल्यांकन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया।
वैज्ञानिकों डॉ. जोगिंदर पाल, डॉ. शेल्जा शर्मा, डॉ. नेहा शर्मा और डॉ. आशिता बिष्ट ने भी किसानों को खेती और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी। वहीं डॉ. प्रदीप कुमार ने राजमाश की उचित पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग को किसानों की आय बढ़ाने के लिए अहम बताया।
बेहतर किस्मों से बढ़ सकती है किसानों की आय
कार्यक्रम के समापन पर निदेशक अनुसंधान डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि लाहौल-स्पीति में राजमाश की खेती किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने क्षेत्र में राजमाश की खेती को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

