कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गाजर घास के बारे में किसानों को किया जागरूक

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कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गाजर घास के बारे में किसानों को किया जागरूक


कृषि विश्वविद्यालय द्वारा गाजर घास के बारे में किसानों को किया जागरूक


धर्मशाला, 19 अगस्त (हि.स.)। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर द्वारा कृषि विज्ञान विभाग एवं इसके कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से गाजर घास जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को पार्थेनियम खरपतवार के हानिकारक प्रभावों तथा इसके प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।

इसी कड़ी में अभियान के तहत बुधवार को पालमपुर उपमंडल के पुन्नर गांव में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 72 किसानों को गाजर घास के मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं फसलों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के साथ-साथ इसकी रोकथाम एवं नियंत्रण के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम शस्य विज्ञान विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें परियोजना प्रभारी डॉ. पंकज चोपड़ा ने किसानों को महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रदान की।

डॉ. चोपड़ा ने बताया कि पार्थेनियम खरपतवार प्रकाश एवं तापमान जैसे पर्यावरणीय कारकों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है तथा यह बड़ी संख्या में हल्के बीज उत्पन्न करता है, जो हवा, पानी, कृषि यंत्रों तथा अन्य माध्यमों से तेजी से फैल जाते हैं। इस खरपतवार में पार्थेनिन नामक रसायन पाया जाता है, जो मनुष्यों एवं पशुओं में दमा, खांसी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली तथा एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

जैविक प्रबंधन के अंतर्गत किसानों को ज़ाइगोग्रामा भृंग जैसे प्राकृतिक शत्रुओं के उपयोग के साथ-साथ अल्टरनेन्थेरा एवं अन्य जैविक विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि पार्थेनियम के एकीकृत प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा सके।

विश्वविद्यालय द्वारा शस्य विज्ञान विभाग एवं केवीके के माध्यम से सप्ताह भर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिससे किसान एवं ग्रामीण समुदाय गाजर घास की पहचान, रोकथाम एवं प्रभावी प्रबंधन अपनाकर कृषि क्षेत्रों एवं आसपास के वातावरण को इस हानिकारक खरपतवार से मुक्त रखने में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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