कालका-शिमला हेरिटेज रेललाइन को पर्यटन से जोड़ने की कवायद, रील और शॉर्ट वीडियो से होगा प्रचार
शिमला, 06 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों के बीच सुरंगों और पुलों से गुजरने वाली कालका-शिमला हेरिटेज रेललाइन को पर्यटन के बड़े आकर्षण के रूप में बढ़ावा देने की तैयारी है। रेलवे ने इसके लिए पर्यटन प्रचार और संरक्षण से जुड़ी विस्तृत योजना बनाई है। शिमला में हुई कालका-शिमला रेलवे की संयुक्त समिति की बैठक में रेललाइन की पर्यटन क्षमता बढ़ाने, ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने और इसका उपयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। योजना के तहत सालभर के कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार किया जाएगा। विरासत दिवस और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। खास बात ये है कि सोशल मीडिया पर रील, शॉर्ट वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री के जरिए रेललाइन की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना है।
बाबा भलकू संग्रहालय और रेललाइन के इतिहास को प्रचार से जोड़ने पर जोर
रेलवे शिमला स्थित बाबा भलकू रेलवे संग्रहालय को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसे पर्यटकों, विद्यार्थियों और रेलवे में रुचि रखने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए प्रचार किया जाएगा। बाबा भलकू राम का नाम कालका-शिमला रेललाइन के निर्माण के इतिहास से जुड़ा है। उन्हें इस कठिन पहाड़ी मार्ग के सर्वेक्षण और मार्ग निर्धारण में ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद करने वाले स्थानीय जानकार के रूप में जाना जाता है। बड़ोग की सुरंग संख्या 33 के सर्वेक्षण से भी उनका नाम जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने दूरी का अनुमान लगाने के लिए छड़ी का इस्तेमाल किया और सर्वेक्षण के दौरान स्थानों की पहचान के लिए सिक्के रखे। समिति ने रेललाइन के आसपास शैक्षणिक भ्रमण, स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाने पर भी चर्चा की। विशेष कोचों की बुकिंग बढ़ाने और रेल आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार किया गया।
बारिश के बीच ट्रैक की सुरक्षा चुनौती, 13 सितंबर तक प्रभावित रहेगी रेल सेवा
पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी के बीच मानसून में रेललाइन की सुरक्षा रेलवे के लिए चुनौती बनी हुई है। 30 अगस्त को सोलन जिले में कोटी और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच पुल नंबर 57 के पास बारिश के कारण ट्रैक के आसपास की मिट्टी बह गई थी। इससे पटरी के नीचे का हिस्सा खुल गया और रेललाइन का एक हिस्सा हवा में लटकने जैसी स्थिति में पहुंच गया। सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने कालका-शिमला के बीच नैरो गेज सेवाएं रोक दी थीं और उस दिन 10 ट्रेनें रद्द की गई थीं। रेलवे ने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और सुरक्षा जांच शुरू की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ सेवाएं 11 सितंबर और कुछ 13 सितंबर तक रद्द रहेंगी। सेवा बहाल करने का निर्णय ट्रैक को सुरक्षित पाए जाने के बाद लिया जाएगा। इस मानसून में कोटी, गुम्मन और तारादेवी के आसपास मलबा गिरने से रेल यातायात पहले भी प्रभावित हुआ है। अगस्त में गुम्मन और कोटी के बीच मलबा गिरने के बाद एक ट्रेन को कोटी में रोकना पड़ा था। इसमें सवार 172 यात्रियों को सेना की मदद से सड़क मार्ग से कालका पहुंचाया गया था।
1903 से चल रही रेललाइन, 2008 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल
करीब 96 किलोमीटर लंबी कालका-शिमला रेलवे 2 फीट 6 इंच चौड़ी नैरो गेज लाइन है। इस पर नवंबर 1903 में रेल सेवा शुरू हुई थी। कालका से शिमला तक जाने वाला यह रेलमार्ग कठिन पहाड़ी भू-भाग से होकर गुजरता है और इसमें कई सुरंगें, पुल और घुमावदार हिस्से हैं। वर्ष 2008 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ‘माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया’ के हिस्से के रूप में शामिल किया गया। अब रेलवे का जोर इस ऐतिहासिक रेलमार्ग के संरक्षण के साथ इसे पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर है। डिजिटल प्रचार, विशेष कार्यक्रमों, बाबा भलकू संग्रहालय और विशेष कोचों के जरिए रेल आधारित पर्यटन को बढ़ाने की योजना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

