‘स्वदेशी टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम’ : जेपी नड्डा

WhatsApp Channel Join Now
‘स्वदेशी टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम’ : जेपी नड्डा


कसौली, 21 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में स्वदेशी रूप से विकसित टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शनिवार को औपचारिक शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने इसे देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने सीआरआई के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीडी वैक्सीन का स्वदेशी विकास एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेगा और भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती देगा।

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मंत्री ने बताया कि टीडी वैक्सीन को अब सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत आपूर्ति के लिए शामिल किया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 तक यूआईपी को 55 लाख खुराक उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। इससे टीकाकरण कार्यक्रम और मजबूत होगा।

भारत की वैश्विक पहचान का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि देश को दुनिया भर में “विश्व की औषधालय” के रूप में मान्यता मिली है और भारत अग्रणी टीका निर्माताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक मानकों में भारत ने परिपक्वता स्तर-3 हासिल किया है, जो देश की मजबूत टीका नियामक व्यवस्था को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे संस्थानों का इसमें बड़ा योगदान रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने टीका विकास के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले किसी वैक्सीन या दवा को विकसित करने में दशकों लग जाते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टेटनस के टीके को विकसित होने में विश्व स्तर पर कई दशक लगे, तपेदिक की दवाओं को तैयार होने में लगभग 30 वर्ष लगे और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके के लिए लगभग एक सदी का वैज्ञानिक प्रयास करना पड़ा।

नड्डा ने वैक्सीन मैत्री पहल का भी जिक्र किया और बताया कि भारत ने लगभग 100 देशों को टीके उपलब्ध कराए, जिनमें से 48 देशों को मुफ्त आपूर्ति की गई। उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की बदौलत भारत घरेलू जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सीआरआई गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) मानकों के तहत टीकों का निर्माण करने वाला पहला सरकारी संस्थान है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story