सुक्खू सरकार की 3 साल की बजट घोषणाएं अधूरी : जयराम ठाकुर

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सुक्खू सरकार की 3 साल की बजट घोषणाएं अधूरी : जयराम ठाकुर


शिमला, 16 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद भी पहले तीन बजटों में की गई कई घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। उनका कहना है कि कई योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई हैं और जमीन पर उनका असर दिखाई नहीं दे रहा।

शिमला से सोमवार को जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव के समय कई गारंटियां दी थीं और बजट में भी कई बड़ी घोषणाएं की थीं, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी उनमें से कई योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि सरकार हर बजट में कुछ योजनाओं का जिक्र करती है, लेकिन उन पर आगे बढ़ने की कोई स्पष्ट स्थिति नजर नहीं आती।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि चुनावी रैलियों में किए गए वादों और विधानसभा में की गई घोषणाओं के बीच फर्क होता है। उनका कहना था कि जब किसी योजना की घोषणा बजट में की जाती है और उसके लिए प्रावधान रखा जाता है, तो उसे लागू करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की दर्जनों घोषणाएं अभी तक फाइलों में ही पड़ी हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में 20 हजार मेधावी छात्राओं को बिजली से चलने वाली स्कूटी खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन अब इस योजना का कोई जिक्र नहीं किया जाता। इसी तरह प्रदेश में छह हरित परिवहन गलियारे बनाने की बात कही गई थी, लेकिन इसके साथ ही बिजली से चलने वाले वाहनों की चार्जिंग पर पर्यावरण उपकर लगा दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन इस दिशा में भी ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। चंबा, नाहन और हमीरपुर में पैट स्कैन सुविधा शुरू करने की घोषणा भी अब तक फाइलों में ही पड़ी बताई जा रही है। उनके अनुसार किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के लिए की गई कई छोटी घोषणाएं भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुक्खू सरकार ने अपने पहले वर्ष में लगभग 63,712 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में करीब 75,496 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में लगभग 58,343 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस तरह तीन वर्षों में करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा सरकार ने इस दौरान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इतना बड़ा बजट पेश करने और भारी कर्ज लेने के बावजूद यदि बजट में घोषित योजनाएं तीन साल में भी शुरू नहीं हो पाती हैं, तो इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जिन योजनाओं के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया था, वे शुरू क्यों नहीं हुईं और उनके लिए तय किया गया पैसा आखिर कहां खर्च हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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