आईटीबीपी जवानों के लिए स्थानीय उत्पादों की खरीद का रास्ता खुला, किन्नौर के पशुपालकों को मिलेगा बाजार

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आईटीबीपी जवानों के लिए स्थानीय उत्पादों की खरीद का रास्ता खुला, किन्नौर के पशुपालकों को मिलेगा बाजार


शिमला, 11 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले पशुपालकों और स्थानीय उत्पादकों के लिए आईटीबीपी के रूप में एक नया बाजार तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की मौजूदगी में मंगलवार को शिमला में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और किन्नौर जिला सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत आईटीबीपी के जवानों के लिए पहाड़ी भेड़ और बकरी के मांस की स्थानीय स्तर पर खरीद और आपूर्ति की जाएगी।

शुरुआती चरण में सहकारी क्षेत्र के माध्यम से आईटीबीपी की कुल मांस जरूरत का करीब 10 प्रतिशत पूरा होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय सहकारी क्षेत्र को हर साल करीब 90 लाख रुपये का आर्थिक अवसर मिलने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में आईटीबीपी की मांस जरूरत का बड़ा हिस्सा सहकारी क्षेत्र के माध्यम से पूरा होने पर इस पहल का सालाना आर्थिक मूल्य करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता आईटीबीपी जवानों के कल्याण के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ स्थायी आर्थिक संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एमओयू के माध्यम से दूर-दराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ तरीके से प्रसंस्कृत भेड़ और बकरी के मांस की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी। वहीं स्थानीय पशुपालकों को सहकारी क्षेत्र के माध्यम से एक भरोसेमंद संस्थागत बाजार मिलेगा। इससे सीमावर्ती गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और लोगों की आजीविका मजबूत होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले समुदायों और आईटीबीपी के बीच संबंध भी और मजबूत होंगे।

उन्होंने बताया कि इस एमओयू को केवल मौजूदा जरूरत तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे स्थानीय उत्पादों की खरीद के लिए व्यापक मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से स्थानीय स्तर पर उत्पादित अंडे, पोल्ट्री, ताजी सब्जियां, ट्राउट मछली और अन्य उपयुक्त स्थानीय उत्पादों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादकों और सहकारी समितियों को सुनिश्चित संस्थागत बाजार मिलेगा और रोजगार तथा आजीविका के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे।

आईटीबीपी के उत्तरी सीमांत के महानिरीक्षक मनु महाराज ने कहा कि आईटीबीपी अपने जवानों के कल्याण के साथ उन समुदायों के साथ मजबूत और स्थायी साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो देश की उत्तरी सीमा के सामाजिक और भौगोलिक परिदृश्य का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के साथ इस तरह की साझेदारी से जवानों की जरूरतें पूरी करने के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ आईटीबीपी का जुड़ाव भी मजबूत होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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