इंडो-यूएस ट्रेड डील किसानों और छोटे उद्योगों के लिए नुकसानदायक: युवा कांग्रेस

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इंडो-यूएस ट्रेड डील किसानों और छोटे उद्योगों के लिए नुकसानदायक: युवा कांग्रेस


शिमला, 13 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इंडो-यूएस ट्रेड डील को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को शिमला स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा कि यह समझौता देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और लघु उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

छत्तर सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम कथित तौर पर एप्सटीन फाइल में सामने आए हैं, उसके बाद ही केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ यह ट्रेड डील की है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल खड़े होते हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस समझौते के कई दुष्प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं। उनके अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, जिससे किसानों को अपने उत्पाद कम कीमतों पर बेचने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस डील के कारण अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में खुली पहुंच मिल जाएगी, जिससे देश के लघु और सूक्ष्म उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा और कई उद्योगों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है।

युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शुभ्रा जिंटा ने भी इस समझौते को एकतरफा बताते हुए कहा कि इसके तहत भारत को अपने उत्पादों पर लगभग 18 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ेगा, जबकि अमेरिका अपने उत्पादों को भारत में शून्य टैरिफ के साथ भेज सकेगा। उनके मुताबिक इससे अमेरिका के व्यापार को फायदा होगा, जबकि भारत के उद्योगों और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डॉ. रणजीत वर्मा ने इस मुद्दे पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने देश के करीब 140 करोड़ लोगों का डेटा अमेरिका के साथ साझा किया है, जो देश की सुरक्षा और नागरिकों की निजता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश अपना डेटा किसी अन्य देश के साथ इस तरह साझा नहीं करते, लेकिन भारत सरकार ने इस मामले में देशहित की अनदेखी की है।

रणजीत वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि इस डील के प्रभाव अब दिखाई देने लगे हैं। उनका कहना था कि केंद्र सरकार ने रूस और ईरान से सस्ते दामों पर तेल खरीदने के बजाय अमेरिका से अधिक कीमत पर उसकी शर्तों के अनुसार तेल खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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