आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज,पौधे हमारी सोच से कहीं ज्यादा हैं संवेदनशील
मंडी, 29 जून (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण शोध के माध्यम से चेतना और बेहोशी की दवा के प्रभाव को लेकर नई वैज्ञानिक समझ विकसित की है। शोध में पाया गया कि बेहोशी की दवा दिए जाने पर पौधों की कोशिकाएं भी एक निश्चित क्रम में कार्य करना बंद करती हैं और दवा का असर समाप्त होने पर उसी क्रम के उलट दोबारा सक्रिय हो जाती हैं। सबसे रोचक तथ्य यह है कि पौधों में न तो मस्तिष्क होता है और न ही तंत्रिका तंत्र, इसके बावजूद उनकी कोशिकाओं में एक जैसी सामूहिक प्रतिक्रिया दर्ज की गई।
यह शोध विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं एडवांस्ड बायोलॉजी और केमिकल एंड बायोमेडिकल इमेजिंग में प्रकाशित हुआ है। शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा, प्रोफेसर चयान कांति नंदी तथा उनकी शोध टीम ने किया।
वैज्ञानिकों ने आधुनिक सूक्ष्मदर्शी तकनीक की सहायता से टमाटर और बैंगन के पौधों की जड़ों की जीवित कोशिकाओं का अध्ययन किया। शोध के लिए जड़ों के सबसे अग्र भाग का चयन किया गया, जिसे पौधे का सबसे सक्रिय हिस्सा माना जाता है। यही भाग आसपास के वातावरण से संकेत प्राप्त कर पौधे की वृद्धि, जल एवं पोषक तत्वों के उपयोग जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का संचालन करता है। वैज्ञानिक इसे पौधे के दिमाग की तरह कार्य करने वाला हिस्सा मानते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि बेहोशी की दवा का असर सबसे पहले कोशिका के ऊर्जा उत्पादन केंद्र पर हुआ। इसके बाद अन्य कोशिकीय संरचनाएं क्रमशः निष्क्रिय होती गईं और अंत में कोशिका का केंद्र प्रभावित हुआ। दवा का प्रभाव समाप्त होने पर यही प्रक्रिया उल्टे क्रम में देखी गई। इसके अलावा सभी कोशिकाओं के केंद्रों में एक साथ समान बदलाव दर्ज किया गया। सक्रिय डीएनए कोशिका केंद्र की बाहरी सतह की ओर स्थानांतरित हुआ, जबकि निष्क्रिय डीएनए अपनी जगह पर बना रहा। यह परिवर्तन सभी कोशिकाओं में लगभग एक ही समय पर हुआ।
प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में चेतना को केवल मस्तिष्क तक सीमित नहीं माना गया है। यह शोध उसी अवधारणा के अनुरूप नए वैज्ञानिक संकेत प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी और गहन अध्ययन की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में चेतना, जीव विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान से जुड़े अनुसंधानों को नई दिशा देने के साथ-साथ यह समझने में भी मदद करेगी कि क्या अन्य जीवों की कोशिकाओं में भी इसी प्रकार की सामूहिक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

