आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण के अनुकूल विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप रोधक समाधान को किया विकसित

मंडी, 16 मई (हि.स.)। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने विभिन्न उपयोगों के लिए बनाए गए जैव-अपघटनीय प्राकृतिक फाइबर से बने मिश्रित पदार्थ विकसित किए हैं, जो खासतौर पर विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप रोकने में कारगर साबित होंगे। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक रेशों से बना ऐसा मैटीरियल बनाया है जो खुद नष्ट हो जाता है और पर्यावरण को नुक्सान नहीं पहुंचाता है। इन्हें कई तरह के कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है, खासतौर पर बिजली के दखल को रोकने में यह काफी फायदेमंद साबित होंगी। क पोजिट को मिलाकर मजबूत मैटीरियल बनाना कोई नई बात नहीं है।

प्राचीन काल से ही लोग दो या उससे ज्यादा क पोजिट को मिलाकर मजबूत मैटीरियल बनाते आ रहे हैं। उदाहरण के तौर परए पुराने जमाने में ईंट बनाने के लिए मिट्टी और सूखी घास को मिलाया जाता था। आजकल पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्राकृतिक रेशों जैसे जूट और गांजे से बनी क पोजिट मटेरियल फिर से लोकप्रिय हो रही हैं। इनका इस्तेमाल कई तरह के उद्योगों में किया जा सकता है। कुछ समय से क पोजिट मैटीरियल का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखने में भी किया जा रहा है।

आसान भाषा में समझें तो बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने से एक तरह का प्रदूषण पैदा होता है, जिसे विद्युत चु बकीय दखल कहते हैं। यह विद्युत चुंबकीय दखल रडार, मिलिट्री के उपकरणों और इंटरनेट के काम को खराब कर सकती है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इस दखल से बचाने के लिए इएमएआई् रोधक पदार्थों की जरूरत होती है और यही काम अब ब्लेंडेड क पोजिट मैटीरियल कर रहे हैं। आईआईटी मंडी और फिनलैंड के वीटीटी रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने मिलकर एक खास तरह के क पोजिट मटेरियल बनाए हैं।

इस टीम का नेतृत्व आईआईटी मंडी के मैकेनिकल और मटेरियल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉण् हिमांशु पाठक और डॉ. सनी जफर कर रहे हैं। इसके अलावा आईआईटी मंडी के रिसर्च स्कॉलर आदित्य प्रताप सिंह और फिनलैंड के वीटीटी रिसर्च सेंटर के रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. सिद्धार्थ सुमन भी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसे क पोजिट मटेरियल बनाना है जो न सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को विद्युत चुंबकीय दखल से बचाए बल्कि पर्यावरण को नुक्सान होने से भी रोकें।

आईआईटी मंडी में स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ हिमांशु पाठक का कहना है कि दीर्घकालिक भविष्य के लिए ऐसे आविष्कारों की ज़रूरत है जो चीजों को बेहतर तो बनाएं ही, साथ ही पर्यावरण को कम से कम नुक्सान पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि हमारी टीम का यह काम जो पर्यावरण के अनुकूल इएमएआई रोकने वाला पदार्थ बनाता है, टेक्नोलॉजी के विकास को पर्यावरण की जि मेदारी के साथ जोड़ता है। पहले इएमएआई रोकने के लिए धातुओं का इस्तेमाल होता था, लेकिन इनमें कुछ कमियां थी, जैसे यह बहुत मोड़े नहीं जा सकते थे, ज्यादा वजऩी होते थे और जंग लगने का खतरा रहता था। पिछले कुछ दशकों में रिसर्च करने वाले इन कमियों को दूर करने के लिए प्लास्टिक के क पोजिट पर ध्यान दे रहे हैं। यह प्लास्टिक के क पोजिट लचीले और हल्के होते हैं। इसके साथ इन्हें आसानी से किसी भी आकार में बनाया जा सकता है और यह ज़्यादा रसायनों के संपर्क में आने पर भी खराब नहीं होते। इन्हें बड़ी मात्रा में बनाना भी आसान है। इस नए और बेहतरीन कंपोजिट के इस्तेमाल की बहुत संभावनाएं हैं। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपकरणों से लेकर हवाई जहाज़ों में सामान रखने की जगहों और ड्रोन तक में किया जा सकता है। व

वहीं आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफे डॉण् सनी जफ़ऱ का कहना है कि इस कंपोजिट में बहुत सी संभावनाएं हैं और इसका असल जिंिदगी में कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिब्बों से लेकर हवाई जहाज़ों में सामान रखने की जगहों और ड्रोन तक में किया जा सकता है। यह नया क पोजिट पर्यावरण को कम नुक्सान पहुंचाता है, इसलिए यह आज के ज़माने की चुनौतियों को हल करने में और पर्यावरण की रक्षा करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। इस शोध के बारे में पूरी जानकारी अमेरिका के एक स मानित जर्नल पॉलिमर कंपोजिट्स में प्रकाशित हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार/ मुरारी/सुनील

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