आईआईटी मंडी में एमबीसीसी-2026 का आयोजन, चेतना एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर विश्व स्तरीय विमर्श
मंडी, 04 जून (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के कमांद परिसर तृतीय अंतरराष्ट्रीय माइंड, ब्रेन एंड कॉन्शसनेस कॉन्फ्रेंस एमबीसीसी 2026 का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र आईकेएसएमएचए द्वारा, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग के संरक्षण में आयोजित किया गया। इस बहुविषयक सम्मेलन का उद्देश्य चेतना, संज्ञान, कल्याण एवं मानव उत्कर्ष पर आधुनिक विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपराओं के समन्वय के माध्यम से गहन विमर्श को आगे बढ़ाना रहा।
एमबीसीसी 2026 में भारत एवं विदेशों से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें शोधकर्ता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षाविद, अभ्यासकर्ता, विद्यार्थी एवं नीति-निर्माता सम्मिलित रहे। सम्मेलन में 290 से अधिक तकनीकी प्रस्तुतियां, 100 पोस्टर सत्र, 18 मुख्य व्याख्यान, 7 आमंत्रित व्याख्यान, 3 पैनल चर्चा, 2 कार्यशालाएँ, 4 प्रतियोगिताएं एवं विभिन्न संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में चेतना अध्ययन, तंत्रिका विज्ञान, संज्ञान विज्ञान, मनोविज्ञान, योग, ध्यान, आयुर्वेद, संस्कृत अध्ययन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानसिक स्वास्थ्य तथा भारतीय ज्ञान परंपराओं जैसे विविध विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
उद्घाटन समारोह में पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम, प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना, विदुषी, कोरियोग्राफर एवं शोधकर्ता, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने दल के साथ एक विशेष भरतनाट्यम प्रस्तुति भी दी। उद्घाटन समारोह में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) प्रभाग के राष्ट्रीय समन्वयक एवं सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर गंटी एस. मूर्ति भी उपस्थित रहे। उन्होंने आईआईटी मंडी की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान देश के सबसे बड़े आईकेएस केंद्रों में से एक स्थापित कर रहा है तथा चेतना अध्ययन के क्षेत्र में नवाचारपूर्ण प्रयास कर रहा है।
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं सम्मेलन प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जिनमें एमबीसीसी 2023 की कार्यवाही, एमबीसीसी 2025 की कार्यवाही, कर्म योग प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा द्वारा, भारतीय ज्ञान परंपराए : एक परिचय प्रोफेसर गौतम आर. देसाई एवं टीम द्वारा, होली तुलसी कॉन्शसनेस एंड त्रिकायी डॉ. महेश लोहड़ एवं टीम द्वारा, द सीक्रेट टाइम ऑफ कोड अजय चतुर्वेदी द्वारा तथा म्यूज़ियोपैथी चित्तरवीणा एन. रविकिरण द्वारा शामिल रहीं।
सम्मेलन में विश्वभर के प्रतिष्ठित विद्वानों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में प्रोफेसर स्टुअर्ट हैमरॉफ संयुक्त राज्य अमेरिका, प्रोफेसर जॉर्जियो अस्कोली संयुक्त राज्य अमेरिका, प्रोफेसर दिमित्रिस ए. पिनोट्सिस यूनाइटेड किंगडम, प्रोफेसर पीटर-जान मेस बेल्जियम, प्रोफेसर जोसेफा बेसेरा गोंज़ालेज़ मेक्सिको एवं प्रोफेसर इथामार थियोडोर इज़राइल शामिल रहे। इनके साथ भारत के प्रमुख विद्वानों में बी.के. शिवानी, प्रोफेसर गंटी एस. मूर्ति, प्रोफेसर सिसिर रॉय, डॉक्टर अनिरबन बंद्योपाध्याय, प्रोफेसर शेखर पी. सेशाद्रि, प्रोफेसर नचिकेता तिवारी, प्रोफेसर सुधीर के. सोपोरी एवं डॉक्टर सुष्रुत जाधव उपस्थित रहे।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा ने कहा कि भारत का विश्वगुरु बनने का दृष्टिकोण केवल भौतिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, चेतना एवं मूल्य आधारित विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शोध अभी प्रारंभिक चरण में है, परंतु निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान मानसिक स्वास्थ्य, नशा एवं मानव विकास जैसी चुनौतियों के समाधान में सहायक हो सकता है।
मुख्य अतिथि पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपराएं शिक्षा को मुक्ति एवं समग्र विकास का माध्यम मानती हैं। आईआईटी मंडी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला एवं आध्यात्मिकता के समन्वय के माध्यम से इस दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है तथा ऐसे प्रयास भारत को वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

