एचआरटीसी कर्मचारियों की चेतावनी, पहली तारीख को वेतन नहीं मिला तो 2 जून से पूरे हिमाचल में होगा बसों का चक्का जाम

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एचआरटीसी कर्मचारियों की चेतावनी, पहली तारीख को वेतन नहीं मिला तो 2 जून से पूरे हिमाचल में होगा बसों का चक्का जाम


शिमला, 30 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों ने वेतन और लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर सरकार और निगम प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी है। चालक-परिचालक यूनियन ने साफ कहा है कि यदि कर्मचारियों को पहली जून को वेतन नहीं मिला तो दो जून से पूरे प्रदेश में एचआरटीसी बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा।

शनिवार को शिमला में यूनियन और निगम प्रबंधन के बीच विभिन्न मांगों को लेकर बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता एचआरटीसी चालक-परिचालक यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने की। बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बार-बार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वेतन नहीं तो काम नहीं। उनका कहना था कि यूनियन ने 13 मई को ही सरकार और निगम प्रबंधन को नोटिस देकर अपनी मांगों और संभावित आंदोलन की जानकारी दे दी थी।

मान सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि पहली जून को कर्मचारियों के खातों में वेतन आ जाता है तो कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन वेतन नहीं मिलने की स्थिति में दो जून से प्रदेशभर में बसों का संचालन प्रभावित होगा। उन्होंने निगम प्रशासन को यह भी सलाह दी कि यदि वेतन जारी होने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो अग्रिम टिकट बुकिंग से बचा जाए। उनका कहना था कि यदि प्रबंधन टिकटों की बुकिंग जारी रखता है और बाद में बसें नहीं चलतीं, तो यात्रियों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।

यूनियन ने केवल वेतन ही नहीं, कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित वित्तीय बकायों का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया है। यूनियन के अनुसार कर्मचारियों का करीब 150 करोड़ रुपये का नाइट ओवरटाइम भुगतान और करोड़ों रुपये का एरियर अब भी लंबित है। इसके अलावा मेडिकल रीइंबर्समेंट के लगभग 20 करोड़ रुपये भी कर्मचारियों को नहीं मिले हैं। यूनियन का कहना है कि प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों को 50 हजार रुपये तक की एरियर किस्त मिल चुकी है, जबकि एचआरटीसी कर्मचारियों को अब तक इसका लाभ नहीं दिया गया है।

हालांकि बैठक में कुछ मांगों पर सहमति भी बनी है। यूनियन के अनुसार चालकों द्वारा 'परना' इस्तेमाल न करने संबंधी आदेश को वापस लेने पर सहमति बनी है। इसके अलावा कर्मचारियों की पदोन्नति, नई भर्ती और रिकवरी से जुड़ी कुछ मांगों को भी प्रबंधन ने स्वीकार किया है। यूनियन ने इन फैसलों के लिए प्रबंधन का आभार भी जताया। लेकिन जब करोड़ों रुपये के लंबित वित्तीय बकायों की बात आई तो प्रबंधन ने बजट की कमी का हवाला देते हुए तत्काल समाधान देने में असमर्थता जताई।

यूनियन का कहना है कि प्रदेश के अन्य विभागों के कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते मिल जाते हैं, जबकि एचआरटीसी कर्मचारी लंबे समय से वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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