एचआरटीसी जनसेवा में कर रही काम, घाटे-मुनाफ़े से न आंकें: मुकेश अग्निहोत्री

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एचआरटीसी जनसेवा में कर रही काम, घाटे-मुनाफ़े से न आंकें: मुकेश अग्निहोत्री


शिमला, 13 जनवरी (हि.स.)। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को केवल घाटे और मुनाफे के नजरिये से देखना सही नहीं है। शिमला में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एचआरटीसी को बने 50 साल पूरे हो चुके हैं और प्रदेश की जनता का इससे भावनात्मक रिश्ता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में न तो पर्याप्त हवाई संपर्क है और न ही मजबूत रेल नेटवर्क, ऐसे में बड़ी आबादी बस सेवाओं पर निर्भर है। रोजाना करीब पांच लाख यात्री एचआरटीसी की बसों से सफर करते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एचआरटीसी को 28 तरह की रियायतें देनी पड़ती हैं। कई दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में निजी ऑपरेटर बसें नहीं चलाते, लेकिन वहां भी एचआरटीसी अपनी सेवाएं देता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से लेकर हर आपदा के समय एचआरटीसी ने लगातार सेवाएं जारी रखीं, ऐसे में इससे मुनाफा कमाने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एचआरटीसी को सरकार से जो भी धन मिलता है, वह राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है और यह संस्था व्यावसायिक नहीं बल्कि जनहित में काम करने वाला उपक्रम है।

इलेक्ट्रिक बसों को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल एक इलेक्ट्रिक बस ट्रायल के तौर पर हिमाचल पहुंची है। इस बस का 18 डिपुओं की 36 जगहों पर परीक्षण किया गया है। अर्की, सोलन और सराहन जैसे क्षेत्रों में ट्रायल कर यह परखा जा रहा है कि पहाड़ी इलाकों में बस की क्षमता, चार्जिंग और संचालन कितना व्यावहारिक है।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े सवाल पर मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि किसी भी बयान का सही अर्थ उसके संदर्भ को समझने के बाद ही स्पष्ट होता है। कई बार बयान सुनने या पढ़ने के बाद ही स्थिति साफ हो पाती है।

हिम कार्ड को लेकर फैली गलतफहमियों पर उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एचआरटीसी में जो व्यवस्था अभी लागू है, वही आगे भी जारी रहेगी। कर्मचारियों के लिए अलग पहचान पत्र है और हिम कार्ड का यात्रा से कोई संबंध नहीं है। पुलिस कर्मियों से जुड़े मामलों की अलग से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी रूट पर लगातार नुकसान हो रहा है तो उसकी समीक्षा की जाएगी, लेकिन केवल घाटे के आधार पर एचआरटीसी को आंकना सही नहीं है।

सिरमौर के हरिपुरधार में हुए बस हादसे पर उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में 82 यात्री सवार थे और हादसे में 14 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग मुख्य कारण प्रतीत हो रहा है, जबकि सड़क पर पाला होने से बस के फिसलने की संभावना भी जताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 148 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 147 को सुधार लिया गया है और वहां क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। रोड सेफ्टी को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं और यूनियनों से भी सुझाव मांगे जाएंगे।

हरिपुरधार में एचआरटीसी के रूट बंद होने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वहां नियमित बस सेवा पहले से नहीं थी। मेला होने के कारण उस दिन ज्यादा यात्री बस में सवार हुए थे। ऐसे मौकों पर स्पेशल बस की मांग की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि एचआरटीसी के पास करीब 3200 बसें हैं, जिनमें से लगभग 500 बसें अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं और उन्हें हटाना जरूरी है। औसतन 15 साल या 9 लाख किलोमीटर चल चुकी बसों को हटाया जाता है। जब तक 300 इलेक्ट्रिक बसें और 250 मिनी बसें नहीं आ जातीं, तब तक पुरानी बसों को पूरी तरह हटाना संभव नहीं है। इसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

शिमला रोपवे परियोजना पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल टेंडर को मंजूरी देना या न देना कैबिनेट का फैसला है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों से मंजूरी लेने में करीब पांच साल लग गए, जिससे परियोजना की लागत बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। डॉलर की कीमत बढ़ने का असर भी लागत पर पड़ा है। यह एक ग्लोबल टेंडर है और कंपनी के साथ बातचीत चल रही है, फिलहाल टेंडर फाइनल नहीं हुआ है।

बाहरी राज्यों की बसों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के तहत तीन लाख रुपये जमा कर रूट लेने की छूट दी गई थी, जिसका हिमाचल ने विरोध किया था। अब स्थिति यह है कि बाहरी बसें दिल्ली से बुकिंग करने के बजाय रास्ते में ही सवारियां उठा रही हैं, जिससे हिमाचल की बसों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सवारी उठाने का अधिकार हिमाचल की बसों का है और इस मामले को लेकर राज्य सरकार अदालत में लड़ाई लड़ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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