हिमाचल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बहाली की मांग, शिक्षकों का प्रदर्शन जारी

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हिमाचल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बहाली की मांग, शिक्षकों का प्रदर्शन जारी


शिमला, 16 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा की रक्षा के साथ करियर प्रगति योजना की बहाली की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ का ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ बुधवार को 15वें दिन भी जारी रहा। शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में भी शिक्षकों ने प्रदर्शन कर अभियान के प्रति एकजुटता जताई।

शिमला में प्रदर्शन के दौरान डॉ. तनुज, डॉ. प्रियंका, डॉ. कंवलजीत, प्रो. दूनी चंद, शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास और संयुक्त सचिव डॉ. अंजली शर्मा ने शिक्षकों को संबोधित किया। डॉ. तनुज ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी शैक्षणिक पहचान और स्वतंत्र कार्यप्रणाली का आधार है।

विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय संस्थागत प्रक्रियाओं और वैधानिक निकायों के माध्यम से लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता को मजबूत किए बिना उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होगा।

डॉ. प्रियंका ने कहा कि शिक्षकों के अकादमिक विकास के लिए पारदर्शी और प्रभावी करियर प्रगति व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने करियर प्रगति योजना बहाल करने की मांग उठाते हुए शिक्षकों के शैक्षणिक विकास और सेवा से जुड़े मामलों का संस्थागत समाधान किए जाने की बात कही। डॉ. कंवलजीत ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी स्वतंत्र पहचान और संस्थागत गरिमा बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने की बात कही।

प्रो. दूनी चंद ने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से जुड़े अधिनियमों, वैधानिक प्रावधानों और संस्थागत प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए शिक्षकों के समक्ष इस विषय के विभिन्न पहलू रखे।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, यह शैक्षणिक स्वतंत्रता और वैधानिक अधिकारों से भी जुड़ी है। शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और करियर प्रगति योजना की बहाली शिक्षकों की प्रमुख मांगें हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, यह विश्वविद्यालय की स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और गरिमापूर्ण कार्यप्रणाली की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जवाबदेही और पारदर्शिता के पक्षधर हैं, लेकिन जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता कमजोर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक कल्याण संघ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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