विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों की प्रमोशन बहाल करने की मांग, 5 नवंबर को जुटेंगे शिक्षक व शोधार्थी

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विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों की प्रमोशन बहाल करने की मांग, 5 नवंबर को जुटेंगे शिक्षक व शोधार्थी


शिमला, 31 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बहाल करने और महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन का लाभ देने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। संघ के अनुसार पिछले 55 दिनों से शिक्षक लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस कड़ी में 5 नवंबर को सुबह 11 बजे शिमला के समरहिल स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभागार में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, शोधार्थी और पूर्व छात्र एकत्रित होंगे। इस दौरान विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर चर्चा के साथ आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास और महासचिव डॉ. अंकुश ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने कृषि, वानिकी, बागवानी, विज्ञान, कला, विधि, चिकित्सा और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और नवाचार का प्रमुख आधार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के तहत मिली स्वायत्तता रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 2 सितंबर को हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2026 लाकर विश्वविद्यालयों के स्थापित अधिनियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है। इसके तहत कार्यकारी परिषद और कुलपति की वित्तीय शक्तियां सीमित कर वित्त सचिव को सौंपने तथा शिक्षकों एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्तियां लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के माध्यम से करवाने का प्रावधान किया गया है। संघ का कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और शोध एवं नवाचार का माहौल कमजोर पड़ेगा।

पदाधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रति-कुलपति, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी सहित कई प्रमुख पदों पर नियुक्तियां सरकार द्वारा की जाती हैं और ऑडिट व्यवस्था भी सरकार के नियंत्रण में है। ऐसे में वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर स्वायत्तता सीमित करने के तर्क पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

संघ ने सरकार से संशोधन विधेयक पर रोक लगाकर शिक्षकों के साथ बातचीत करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों के समर्थन में है। संघ ने प्रदेशवासियों से 5 नवंबर की बैठक में शामिल होकर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

Livevns.news Desk
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