हिमाचल विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के विरोध में एसएफआई का प्रदर्शन

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हिमाचल विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के विरोध में एसएफआई का प्रदर्शन


शिमला, 12 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में हाल ही में की गई फीस बढ़ोतरी के विरोध में शुक्रवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की विश्वविद्यालय इकाई ने समर हिल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने कुछ समय के लिए चक्का जाम भी किया और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, छात्रावासों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

एसएफआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लागू की गई फीस वृद्धि छात्र हितों के खिलाफ है और इससे उच्च शिक्षा आम छात्रों की पहुंच से दूर हो सकती है। संगठन का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र पढ़ाई करते हैं। ऐसे में फीस बढ़ने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

धरने को संबोधित करते हुए एसएफआई के उपाध्यक्ष आशीष ने कहा कि शिक्षा सभी छात्रों का अधिकार है और इसे आर्थिक क्षमता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार फीस बढ़ने से गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय की स्थापना सभी वर्गों के विद्यार्थियों को सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन मौजूदा नीतियां इस उद्देश्य के विपरीत दिखाई देती हैं।

प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पदों, छात्रावासों में सुविधाओं की कमी, पुस्तकालयों में संसाधनों के अभाव और आधारभूत ढांचे से जुड़ी समस्याओं का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इन समस्याओं को दूर करने के बजाय प्रशासन फीस बढ़ाकर छात्रों पर बोझ डाल रहा है।

एसएफआई की महिला उप समिति की संयोजक अंकिता ने कहा कि संगठन फीस वृद्धि के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धरना-प्रदर्शन, रैलियां और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति, शिक्षा के निजीकरण और सरकारी विश्वविद्यालयों में बढ़ती फीस का भी मुद्दा उठाया। एसएफआई का कहना है कि विश्वविद्यालयों की वित्तीय चुनौतियों का समाधान छात्रों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालकर नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने सरकार से उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की मांग की है।

एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि का फैसला तुरंत वापस लेने, छात्र हितों से जुड़े फैसलों में छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और विश्वविद्यालय की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब तक फीस वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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