पांच महीने बाद भी मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल नहीं, बिजली बोर्ड कर्मचारियों में नाराज़गी: यूनियन

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शिमला, 04 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्प्लॉयज यूनियन ने कहा है कि मुख्यमंत्री की ओर से करीब साढ़े पांच महीने पहले की गई घोषणाओं पर अब तक आदेश जारी नहीं हुए हैं। इससे बिजली बोर्ड कर्मचारियों में नाराज़गी बढ़ रही है। यूनियन ने कहा है कि इस देरी से कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति भी बन सकती है।

यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नितिश भारद्वाज और महासचिव प्रशान्त शर्मा ने शनिवार को कहा कि 15 अक्टूबर को यूनियन के 18वें महासम्मेलन में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं पर अब तक बिजली बोर्ड प्रबंधन की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों में रोष है और सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन ने पदोन्नति से जुड़ी सभी फाइलों को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजने की नई व्यवस्था शुरू कर दी है, जिसके कारण पदोन्नतियों में देरी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया के कारण कई मामलों में त्रुटियां सामने आई हैं और कुछ वरिष्ठ कर्मचारी भी जूनियर हो गए हैं। यूनियन का कहना है कि इससे भविष्य में कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं, लेकिन इस मुद्दे को बोर्ड चेयरमैन के सामने उठाने के बावजूद अभी तक कोई सुधार नहीं किया गया है। इसके अलावा जेओए (आईटी) कर्मचारियों की कन्फर्मेशन भी लंबे समय से लंबित बताई गई है।

यूनियन ने यह भी कहा कि करुणामूलक आधार पर भर्ती से जुड़े मामलों में भी अब तक आदेश जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही अंडर सेक्रेटरी, सेक्शन ऑफिसर, सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2, अकाउंट्स ऑफिसर और सहायक अभियंता (सिविल और इलेक्ट्रिकल) जैसे कई पदों के लिए विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें नहीं हो पाई हैं, जिससे कुछ कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

यूनियन के अनुसार बिजली बोर्ड प्रबंधन पिछले दो वर्षों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट का भुगतान भी नहीं कर पाया है, जबकि कर्मचारियों के कई दावे भी लंबित हैं। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों में नाराज़गी बढ़ रही है।

इन मुद्दों को लेकर यूनियन के राज्य पदाधिकारियों की बैठक 6 और 7 अप्रैल को शिमला में बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति और विरोध के स्वरूप पर फैसला लिया जाएगा। यूनियन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे बिजली बोर्ड में लंबित मामलों, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और नई भर्तियों जैसे मुद्दों पर गंभीरता से हस्तक्षेप करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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