हिमाचल में भूस्खलन से एक नेशनल हाइवे व 166 सड़कें अवरुद्ध, 21 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट
शिमला, 19 अगस्त (हि.स.)। रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच हिमाचल प्रदेश में लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को भी राज्य के कई हिस्सों में मॉनसून की तेज बारिश हुई, जिसके बाद भूस्खलन, पेड़ गिरने और नालों में पानी बढ़ने की घटनाएं सामने आईं। इसका असर सड़क संपर्क से लेकर बिजली और पेयजल सेवाओं तक दिखाई दिया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बुधवार शाम तक एक नेशनल हाइवे और 166 सड़कें बंद थीं। मंडी जिले में सबसे अधिक 84 सड़कें और मंडी-कोटली-धर्मपुर नेशनल हाइवे रोपड़ू क्षेत्र में अवरुद्ध है। कुल्लू में 35, सिरमौर में 12 तथा शिमला, ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर में छह-छह सड़कें बंद हैं। सुबह के समय राज्य में 279 सड़कें बंद थी, जिनमें मंडी, चंबा, शिमला और कुल्लू सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल रहे।
राज्य के निचले इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश, सुजानपुर टीहरा में सबसे ज्यादा बरसे बादल
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 156 मिलीमीटर बारिश हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीहरा में दर्ज की गई। इसके अलावा बिलासपुर के नैना देवी में 136 मिलीमीटर, हमीरपुर के नादौन में 128 मिलीमीटर, धर्मशाला में 127 मिलीमीटर, ऊना के भरवाई में 118 मिलीमीटर तथा कांगड़ा के गगल और पालमपुर में 111-111 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। नगरोटा सूरियां में 90 मिलीमीटर वर्षा हुई।
मौसम विभाग ने 21 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 20 अगस्त को ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों में तथा 21 अगस्त को ऊना, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। विभाग का कहना है कि 22 से 25 अगस्त तक भी प्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
बिजली और पानी की व्यवस्था भी प्रभावित
लगातार बारिश का असर जरूरी सेवाओं पर भी पड़ा है। बुधवार शाम तक प्रदेश में 130 बिजली ट्रांसफार्मर बंद थे। इनमें लाहौल-स्पीति के स्पीति उपमंडल में 68 और हमीरपुर जिले में 42 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। वहीं 222 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं। सबसे अधिक 107 पेयजल योजनाएं हमीरपुर जिले में प्रभावित हुई हैं। सिरमौर में 55, बिलासपुर में 28 और कांगड़ा में 26 योजनाएं बंद हैं। दिन के समय जारी रिपोर्ट में 310 ट्रांसफार्मर और 84 पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी दी गई थी। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बिजली और पानी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच लाहौल-स्पीति की मयाड़ घाटी में अचानक आई बाढ़ से करपट नाले पर बना पुल पानी में डूब गया और गांव को जोड़ने वाला सड़क मार्ग कट गया। बाढ़ से खेती योग्य भूमि और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है।
205 लोगों की मौत, नुकसान 1033 करोड़ रुपये से अधिक
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 30 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 205 लोगों की मौत हो चुकी है, 318 लोग घायल हुए हैं और तीन लोग लापता हैं। मृतकों में 121 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है। इसके अलावा 15 लोगों की मौत भूस्खलन, पांच की बहने, 29 की पहाड़ी से फिसलने या पेड़ गिरने तथा आठ लोगों की मौत करंट लगने से हुई है। मानसून के दौरान 434 पशुओं की भी मौत हुई है। राज्य में 85 घर, 14 दुकानें और 296 पशुशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि 325 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक 1033 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक करीब 750 करोड़ रुपये का नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की अपील की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

