हिमाचल में फिर तेज हुआ मानसून, 76 सड़कें बंद, नाथपा बांध से छोड़ा पानी
शिमला, 31 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में अगस्त के आखिरी दिन बारिश ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को शिमला समेत कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 76 सड़कें बंद हो गई हैं। पांच बिजली ट्रांसफार्मर और 72 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार छह सितंबर तक राज्य में मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दो सितंबर को शिमला, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। तीन सितंबर को कांगड़ा और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। चार सितंबर को भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। पांच और छह सितंबर को भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है, हालांकि इन दोनों दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार सोमवार शाम तक मंडी जिले में सबसे अधिक 32 सड़कें बंद थीं। कुल्लू में 16, चंबा में आठ और कांगड़ा में सात सड़कें अवरुद्ध हैं। अन्य जिलों में भी बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कें प्रभावित हुई हैं। मंडी में पांच बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं। पेयजल योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा है। हमीरपुर में 37, सिरमौर के संगड़ाह में 24 और चंबा के भटियात में नौ पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
बीते 24 घंटे में भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। चंबा जिले के चुवाड़ी में सबसे अधिक 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा में 70.4 मिलीमीटर, बिलासपुर के मलरांव में 70.0 मिलीमीटर और मंडी के जोगिंदरनगर में 70.0 मिलीमीटर बारिश हुई। सिरमौर के धौलाकुआं एडब्ल्यूएस में 66.0 मिलीमीटर, बिलासपुर के ब्राह्मणी में 62.2 मिलीमीटर और मंडी के मुरारी देवी में 61.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
बिलासपुर की नैना देवी में 60.8 मिलीमीटर, शिमला में 59.8 मिलीमीटर, ऊना के रायपुर मैदान में 48.4 मिलीमीटर, सिरमौर के पांवटा साहिब में 45.4 मिलीमीटर, शिमला के शिलारू में 45.2 मिलीमीटर और सिरमौर के नाहन में 40.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
बारिश का असर कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर भी पड़ा है। सोलन जिले में रेल ट्रैक के एक पुल के नीचे से मिट्टी धंसने के बाद इस मार्ग पर रेल सेवा लगातार दूसरे दिन भी बंद रही। रेलवे ने आगामी आदेश तक इस मार्ग पर ट्रेनों का संचालन रोक दिया है। सोमवार को भी इस रूट की ट्रेनें रद्द रहीं। इससे ऐतिहासिक कालका-शिमला रेल मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी बीच नाथपा बांध से भी अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की सूचना दी गई है। सर्वसाधारण को जारी सूचना के अनुसार सोमवार शाम रेडियल गेट के रखरखाव के लिए रेडियल गेट नंबर तीन से करीब 520 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। इसके बाद नाथपा बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में संभावित कुल जल प्रवाह करीब 601 क्यूमेक्स हो गया है। इसमें रेडियल गेट से छोड़ा गया 520 क्यूमेक्स और एसएफटी से 81 क्यूमेक्स पानी शामिल है।
परियोजना प्रबंधन ने कहा है कि अगर पानी की आवक यानी इनफ्लो में और बढ़ोतरी होती है तो अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा सकता है। परियोजना प्रमुख ने लोगों से नदी और नालों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
इस मानसून सीजन में बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं का असर जान-माल पर भी पड़ा है। प्रदेश में अब तक 256 लोगों की मौत हो चुकी है और 465 लोग घायल हुए हैं। तीन लोग अभी लापता हैं। मृतकों में 151 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है, जबकि 105 लोगों की जान भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, पानी में बहने, फिसलने, पहाड़ी से गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में गई है।
प्राकृतिक आपदाओं और बारिश के कारण प्रदेश में 455 मवेशियों की भी मौत हुई है। बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से 102 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 438 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
सरकार के आकलन के अनुसार मानसून सीजन में अब तक प्रदेश को करीब 1,202 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें अकेले लोक निर्माण विभाग का करीब 914 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

