हिमाचल में अगले चार दिन भारी बारिश का खतरा, कई जिलों में येलो अलर्ट, दो बांधों से छोड़ा गया पानी
शिमला, 30 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत दे रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 31 अगस्त से 3 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इस दौरान कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। इस बीच सिरमौर के गिरि जटोंन बांध से पानी छोड़ा गया है और निचले व मैदानी इलाकों के लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। नाथपा बांध से भी शनिवार शाम अतिरिक्त पानी छोड़ा गया था। पिछले 24 घंटों में सिरमौर जिला के धौलाकुआं में सबसे अधिक 38.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून की गतिविधियां पिछले कुछ दिनों में कमजोर रही थीं, लेकिन अब बारिश का दौर फिर बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार 31 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 1 सितंबर को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश की संभावना है। 2 सितंबर को हमीरपुर, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। 3 सितंबर को भी कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। विभाग के सात दिन के पूर्वानुमान में 31 अगस्त से 3 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 4 और 5 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी नहीं है।
बीते 24 घंटों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार धौलाकुआं ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में 38.5 मिलीमीटर, घाघस में 30, पालमपुर में 23.8, मुरारी देवी में 22, काहू में 11.6, पंडोह में 10 और जोगिंदरनगर में 8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मुरारी देवी और सुंदरनगर में गरज-चमक भी हुई। हालांकि प्रदेश में कहीं ओलावृष्टि, कोहरा या तेज हवाएं दर्ज नहीं की गईं।
सोलन जिले के परवाणू में बीती शाम हुई तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर रेलों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। यात्रियों को सड़क मार्ग से शिमला और कालका पहुंचाया गया। सिरमौर जिले के कई हिस्सों में भी बारिश जारी है। बढ़ते जलस्तर के बीच गिरि जटोंन बांध के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। निचले और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों के पास नहीं जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
गिरि जटोंन बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है।
उधर नाथपा बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद शनिवार शाम से रेडियल गेटों के माध्यम से करीब 145 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा गया।
शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रविवार सुबह से बादल छाए हुए हैं। वहीं मैदानी इलाकों में बारिश कम होने या नहीं होने के कारण उमस बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है।
मानसून ने इस साल 30 जून को हिमाचल में दस्तक दी थी और आम तौर पर सितंबर के अंत तक इसकी विदाई की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में अगले कुछ दिनों की बारिश मानसून की आगे की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बारिश कम होने के बाद भी मानसून से जुड़ी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार रविवार सुबह तक प्रदेश में भूस्खलन के कारण 64 सड़कें बंद थीं और 225 बिजली ट्रांसफार्मर काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा 9 पेयजल परियोजनाएं भी प्रभावित थीं।
सड़क बंद होने के मामलों में मंडी सबसे आगे है। यहां 24 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 16, कांगड़ा और सिरमौर में सात-सात, ऊना में चार, शिमला में तीन, चंबा में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है। बिजली आपूर्ति के मामले में मंडी के गोचर में 217 और लाहौल-स्पीति के उदयपुर में आठ ट्रांसफार्मर ठप हैं। पेयजल योजनाओं में हमीरपुर के बड़सर की सात और शिमला के रामपुर की दो योजनाएं प्रभावित हैं।
इस मानसून सीजन में बारिश और इससे जुड़े हादसों में अब तक 250 लोगों की मौत और 449 लोग घायल हुए हैं। इनमें 147 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है, जबकि भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, बहने, फिसलने, पहाड़ी से गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में 103 लोगों की जान गई है।
बारिश और प्राकृतिक आपदाओं में 451 मवेशियों की भी मौत हुई है। प्रदेश में 99 घर पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, जबकि 433 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानें और 382 पशुशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
सरकार के आकलन के अनुसार मानसून से प्रदेश में अब तक 1,184 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से विभाग की करीब 897 करोड़ रुपये की क्षति आंकी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

