कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत का मामला सदन में उठा, डॉक्टर समेत तीन निलंबित
शिमला, 31 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला की मौत का मामला उठा। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने यह मामला उठाते हुए सरकार से जांच की वर्तमान स्थिति और इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में कहा कि इस मामले में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला की मौत अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दो स्तरों पर जांच की जा रही है। एक जांच अस्पताल प्रबंधन की ओर से की जा रही है, जबकि दूसरी जांच स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञों के बोर्ड से कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में बिना किसी दबाव और पक्षपात के कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल दोषियों के खिलाफ होगी और किसी निर्दोष को सजा नहीं दी जाएगी।
सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विपक्ष से इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता को समझती है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन को बताया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एक डॉक्टर और दो स्वास्थ्य कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन कर चिकित्सा सेवाओं को बाधित करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सरकार की ओर से कहा गया कि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित करने की किसी भी घटना को अलग से देखा जा रहा है और पुलिस ने इस संबंध में कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

