स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिल आए तो एक साल के रिकॉर्ड से होगी जांच: मुख्यमंत्री सुक्खू
शिमला, 27 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर बढ़ते बिलों की शिकायतों पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि अगर किसी उपभोक्ता का बिल स्मार्ट मीटर लगने के बाद ज्यादा आता है, तो उसकी जांच पिछले एक साल के बिजली बिलों के आधार पर की जाएगी और जहां कमी मिलेगी, उसे ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उपभोक्ता संबंधित एक्स-ईएन (एक्सईएन) से शिकायत कर सकते हैं, जिनको जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह बात शुक्रवार को विधानसभा में विधायक राम कुमार के अनुपूरक सवाल के जवाब में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का काम केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत किया जा रहा है और इनके लिए जरूरी मानक पहले से तय हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राज्य सरकार स्मार्ट मीटर लगाने का काम नहीं करती है, तो केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राशि में कटौती हो सकती है।
विधानसभा में विधायक आशीष बुटेल के मूल प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि आरडीएसएस-एक और आरडीएसएस-दो योजना के तहत पालमपुर विधानसभा क्षेत्र में ट्रांसफार्मर, बिजली लाइन और सब-स्टेशन जैसे कार्यों के लिए 3224.07 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के दो मुख्य घटक हैं लॉस रिडक्शन वर्क्स और स्मार्ट मीटरिंग वर्क्स।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉस रिडक्शन से जुड़े कार्य मैसर्ज आरवीएनएल को सौंपे गए हैं, जबकि स्मार्ट मीटर लगाने का काम मैसर्ज अपरावा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। उन्होंने बताया कि पालमपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 42 हजार 934 बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से अब तक 1179 उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बाकी उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का काम अभी जारी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर बदलने की प्रक्रिया धीमी चलने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारणों का पता लगाया जाएगा और संबंधित अधिकारियों से इस बारे में जानकारी ली जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी लोगों को स्मार्ट मीटर से जुड़े बिलों में दिक्कत आ रही है, वहां उनकी शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

