कांग्रेस विधायकों ने सदन में उठाया पीएमजीएसवाई सड़कों में देरी का मुद्दा, मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का दिया भरोसा
शिमला, 02 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को प्रश्नकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-3) के तहत बन रही सड़कों में देरी का मुद्दा उठा। खास बात यह रही कि यह सवाल सत्तापक्ष के ही दो विधायकों मुख्यमंत्री की पत्नी व देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर और ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन ने उठाया और अपनी ही सरकार से जवाब मांगा।
विधायकों ने देहरा और ज्वालामुखी क्षेत्रों में मैसर्ज गर्ग सन्ज बालाजी ईएनटी (जेवी) नाम की फर्म को दिए गए सड़क निर्माण कार्यों में देरी का मामला उठाते हुए कहा कि ठेकेदार ने कई सड़कें तो ले ली हैं, लेकिन निर्माण कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने कहा कि फर्म की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है और आपसी विवादों के कारण भी काम प्रभावित हो रहा है। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार एक दिन देहरा में काम करता है और दूसरे दिन शाहपुर में, जिससे निर्माण कार्य लगातार प्रभावित हो रहा है।
विधायक संजय रतन ने कहा कि इस फर्म को 26 सड़कों का काम मिला हुआ है और यह उत्तराखंड में ब्लैकलिस्ट भी रह चुकी है। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र के दौरान भी यह मामला उठाया गया था और सरकार ने जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार निचले स्तर के अधिकारियों को डराता है और सीधे उच्च अधिकारियों से संपर्क करता है। उन्होंने मांग की कि इस फर्म के टेंडर रद्द किए जाएं और भविष्य में एक ही ठेकेदार को ज्यादा सड़कों का काम देने के बजाय पैकेज को अलग-अलग ठेकेदारों में बांटा जाए।
विपक्ष के सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर सहमति जताई और कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों के निर्माण कार्य में देरी हो रही है।
इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार समय पर काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों की शुरुआत अब तक नहीं हुई है, उन्हें रद्द करने पर भी विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में नियमों में बदलाव कर एक ठेकेदार को केवल एक या दो ही काम देने का प्रावधान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई बार बाहरी राज्यों, खासकर पंजाब के ठेकेदार यहां काम ले लेते हैं, लेकिन प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार काम नहीं कर पाते, जिसके कारण परियोजनाएं लटक जाती हैं।
इस दौरान विधायक कमलेश ठाकुर ने कहा कि संबंधित फर्म में बाप-बेटे के बीच चल रहे विवाद का असर भी काम पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण कार्य अधूरा रहने से पूरे विधानसभा क्षेत्र में धूल और मिट्टी की समस्या बढ़ गई है, जिससे लोगों के बीमार होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

