हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की छह किश्तें लंबित

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हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की छह किश्तें लंबित


शिमला, 26 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत आने वाले सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) की छह किश्तें लंबित हैं। इन छह किश्तों की कुल दर 15 प्रतिशत है। इनमें सबसे पुरानी किश्त एक जुलाई 2023 से लंबित है। यह जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जम्बाल के सवाल के लिखित जवाब में दी।

मुख्यमंत्री के अनुसार एक जुलाई 2023 से महंगाई भत्ते की एक प्रतिशत किश्त लंबित है। इसके बाद एक जनवरी 2024 से चार प्रतिशत, एक जुलाई 2024 से तीन प्रतिशत, एक जनवरी 2025 से दो प्रतिशत, एक जुलाई 2025 से तीन प्रतिशत और एक जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित है। इन छह किश्तों को जोड़ने पर कुल लंबित महंगाई भत्ता 15 प्रतिशत बनता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की इन किश्तों का भुगतान करने में देरी हो रही है। सरकार ने वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद लंबित भुगतान कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में दो तरह के नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें एक वर्ग न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) के तहत आता है, जबकि दूसरा वर्ग पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत कार्यरत है।

मुख्यमंत्री के अनुसार एनपीएस और यूपीएस के तहत कार्यरत कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर वर्तमान में 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले केंद्र और हिमाचल सरकार के महंगाई भत्ते की दरों में अंतर था। अब इन कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है और इनकी महंगाई भत्ते की कोई किश्त लंबित नहीं है।

दूसरी ओर ओपीएस के तहत आने वाले कर्मचारियों को प्रदेश सरकार की ओर से 15 अक्तूबर 2025 से 45 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार में वर्तमान में महंगाई भत्ते की दर 60 प्रतिशत है। हिमाचल में ओपीएस कर्मचारियों को मिल रहे 45 प्रतिशत और केंद्र की 60 प्रतिशत दर के बीच 15 प्रतिशत का अंतर है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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