हिमाचल का दूध अब प्रदेश में ही खपाने की तैयारी, ढगवार में जल्द शुरू होगा मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट

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हिमाचल का दूध अब प्रदेश में ही खपाने की तैयारी, ढगवार में जल्द शुरू होगा मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट


शिमला, 31 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार आने वाले एक साल के भीतर राज्य का दूध बाहर बेचने की बजाय प्रदेश में ही खपाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा के मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में बन रहा आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट इस दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस प्लांट में विश्वस्तरीय मशीनें लगाई जा रही हैं और इसका संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा किया जाएगा। करीब 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यह प्लांट इस साल अक्टूबर तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्लांट के शुरू होने से प्रदेश में उत्पादित दूध की खपत राज्य के भीतर ही हो सकेगी और किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि यहां दूध के साथ-साथ घी, लस्सी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और डेयरी क्षेत्र को टिकाऊ आय का स्रोत बनाना है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रदेश सरकार किसानों को नुकसान से बचाने के लिए करीब 26 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा सहन करते हुए दूध बाहर भेज रही है। उन्होंने बताया कि अभी कुछ मात्रा में दूध अमूल जैसी संस्थाओं को बेचा जा रहा है और वहां से फैट निकालकर वही दूध फिर हिमाचल में बेचा जाता है। सरकार इस व्यवस्था में बदलाव कर रही है, ताकि भविष्य में दूध पाउडर बनाने के बजाय घी तैयार कर सस्ती दरों पर प्रदेश के लोगों को उपलब्ध कराया जा सके।

मूल प्रश्न का जवाब देते हुए पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ने के कारण मौजूदा प्लांटों की क्षमता से अधिक दूध की खरीद हो रही है, जिससे उसका पूरा प्रोसेस नहीं हो पा रहा। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार जल्द ही हमीरपुर और ऊना में नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करेगी। इसके अलावा कुल्लू में भी नया प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए जायका (JICA) से वित्तीय सहयोग मिला है।

उन्होंने कहा कि दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बल्क मिल्क चिलिंग की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा और जल्द ही नए चिलिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दूध उत्पादकों की संख्या बढ़ने से अतिरिक्त दूध अमूल और मदर डेयरी जैसी संस्थाओं को बेचना पड़ रहा है, लेकिन ढगवार प्लांट के शुरू होने के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।

प्रश्नकाल के दौरान धर्मपुर से विधायक चंद्रशेखर ने अनुपूरक प्रश्न में धर्मपुर क्षेत्र को ढगवार प्लांट से जोड़ने की मांग उठाई और डेयरी क्षेत्र में निजी निवेश को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया। वहीं विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में दूध का कलेक्शन बढ़ा है, लेकिन पर्याप्त प्रोसेसिंग नहीं हो पाने से किसानों को परेशानी हो रही है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए नए चिलिंग सेंटर खोलने की योजना के बारे में जानकारी मांगी।

इसके अलावा विधायक लोकेंद्र कुमार ने दत्तनगर क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर दूध उत्पादन का उल्लेख करते हुए इस दूध को ढगवार प्लांट तक पहुंचाने के लिए ठोस व्यवस्था करने की जरूरत बताई।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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