हिमाचल विधानसभा: भाजपा ने मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया

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हिमाचल विधानसभा: भाजपा ने मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया


शिमला, 18 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत पहले ही दिन राजनीतिक टकराव के साथ हुई। विपक्षी दल भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सौंपा है। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने सदन में अपने बयानों के जरिए भ्रामक धारणा बनाई और तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया।

यह नोटिस 20 से ज्यादा भाजपा विधायकों के हस्ताक्षरों के साथ ‘कार्य-संचालन तथा प्रक्रिया नियमों’ के नियम 75 के तहत दिया गया है। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि इस नोटिस को स्वीकार कर मामले की जांच विशेषाधिकार समिति को सौंपी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि सरकार सभी संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखे और अगर सदन को गुमराह किया गया है तो मुख्यमंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

भाजपा ने अपने नोटिस में संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी मंत्री की यह जिम्मेदारी होती है कि वह सदन के सामने पूरी तरह सही और स्पष्ट जानकारी रखे। अगर कोई मंत्री गलत बयान देता है, तथ्यों को छिपाता है या ऐसी स्थिति बनाता है जिससे सदन गुमराह हो, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री के कुछ बयान इसी दायरे में आते हैं।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि इससे पहले भी विपक्ष खासकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर कई बार मुख्यमंत्री के बयानों को लेकर सवाल उठा चुके हैं और सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस हो चुकी है। हालांकि यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री के खिलाफ औपचारिक रूप से विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है।

भाजपा ने अपने नोटिस में कुल 11 ऐसे मामलों का जिक्र किया है, जिनमें मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। ये मामले मुख्य रूप से पिछले तीन वर्षों—2023-24, 2024-25 और 2025-26—के बजट भाषणों में की गई घोषणाओं से जुड़े हैं। विपक्ष का कहना है कि इन घोषणाओं को जिस तरह सदन में पेश किया गया, उस तरह से ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया, जिससे लोगों और विधायकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी है।

इन मुद्दों में राज्य को 2026 तक ग्रीन एनर्जी राज्य बनाने का लक्ष्य, 1500 डीज़ल बसों को बदलने की योजना, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी नीति, ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 1311 करोड़ रुपये का पर्यटन मेगा प्लान, 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्टार्टअप योजना, महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 2500 कृषि क्लस्टर बनाने की योजना, दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और खाली पदों को भरने जैसी घोषणाएं शामिल हैं।

विपक्ष का आरोप है कि इन योजनाओं की प्रगति और वास्तविक स्थिति को लेकर सरकार ने सदन में पूरी जानकारी नहीं दी, जिससे एक अलग तस्वीर पेश की गई। अब इस मुद्दे पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को लेना है कि वह इस नोटिस को स्वीकार करते हैं या नहीं और आगे की कार्रवाई क्या होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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