हिमाचल विधानसभा में किसान आयोग विधेयक पारित

WhatsApp Channel Join Now
हिमाचल विधानसभा में किसान आयोग विधेयक पारित


हिमाचल विधानसभा में किसान आयोग विधेयक पारित


शिमला, 02 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए राज्य सरकार ने किसान आयोग के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। गुरुवार को विधानसभा में किसान आयोग विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने यह विधेयक सदन में पेश किया, जिसे बहुमत से मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही प्रदेश में एक संगठित किसान आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित किसान आयोग में एक अध्यक्ष सहित कुल आठ सदस्य होंगे। इनमें पांच सरकारी और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य शामिल किए जाएंगे। कृषि विभाग के निदेशक आयोग में सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे और आयोग के कामकाज के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक आयोग के अध्यक्ष के लिए न्यूनतम स्नातक योग्यता अनिवार्य रखी गई है। साथ ही, अध्यक्ष का एक प्रगतिशील हिमाचली किसान होना भी जरूरी होगा। आयोग में पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय और नौणी स्थित वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को सदस्य बनाया जाएगा। इसके अलावा बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन विभागों के निदेशक भी आयोग में सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

सरकार का कहना है कि प्रदेश में खेती की घटती लाभप्रदता, भू-जोतों का लगातार छोटा होना और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों ने किसानों की परेशानियां बढ़ाई हैं। ऐसे में किसान आयोग इन समस्याओं का अध्ययन करेगा और उनके समाधान के लिए सरकार को व्यावहारिक और ठोस सुझाव देगा, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाया जा सके।

वित्तीय व्यवस्था के तौर पर आयोग के संचालन पर हर साल करीब 85 लाख रुपये का आवर्ती खर्च आने का अनुमान है, जबकि 50 लाख रुपये का अनावर्ती खर्च भी प्रस्तावित किया गया है। सरकार का मानना है कि इस खर्च से किसानों से जुड़े मुद्दों पर संस्थागत स्तर पर काम करने में मदद मिलेगी और नीतिगत फैसलों को दिशा मिलेगी।

विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधायक कुलदीप राठौर और भाजपा के विधायक हंसराज ने भी अपने सुझाव दिए। उन्होंने आयोग में अधिक से अधिक हिमाचली लोगों को शामिल करने और अध्यक्ष पद पर कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ को नियुक्त करने की जरूरत पर जोर दिया। सरकार की ओर से कहा गया कि आयोग का उद्देश्य किसानों की आवाज को मजबूत मंच देना और उनकी समस्याओं का समाधान तलाशने में सहयोग करना है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story