प्रदेश में ड्रग्स के बढ़ते खतरे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वाकआउट

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प्रदेश में ड्रग्स के बढ़ते खतरे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वाकआउट


शिमला, 20 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे को लेकर शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा जोरशोर से उठा, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने नजर आए। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह नशीले पदार्थों जैसे गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है और इसे बेवजह सनसनीखेज बना रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में ड्रग्स की समस्या केवल उनकी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में नहीं बढ़ी, बल्कि यह पहले से चली आ रही समस्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ प्रचार पाने के लिए उठा रही है।

सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार ने उन पंचायतों की पहचान और मैपिंग की है, जहां नशे की समस्या ज्यादा है, ताकि समय रहते रोकथाम के उपाय किए जा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार नशे की वजह से अपने बच्चों को न खोए। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि चिट्टा तस्करी में शामिल 11 पुलिसकर्मियों और 8 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि 60 अन्य लोगों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कुल्लू में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी भी पुलिस की अपनी कार्रवाई का ही हिस्सा है, जो ड्रग माफिया के साथ मिले हुए पाए गए थे।

इस दौरान विपक्ष ने नारेबाजी की और भाजपा विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में वह विपक्ष सहित सभी का सहयोग चाहते हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे बिना कारण अपना आपा खो देते हैं और संभव है कि भाजपा के अंदरूनी मतभेदों का असर उनके व्यवहार में दिख रहा हो। सुक्खू ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ ‘वॉकाथॉन’ जैसे कार्यक्रम जागरूकता फैलाने के लिए किए जा रहे हैं और सरकार इस समस्या से निपटने के लिए गंभीर है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ड्रग माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जबकि उसे नशे के खिलाफ लड़ाई में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों को नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कामों में व्यस्त रखा जा रहा है।

जयराम ठाकुर ने कुल्लू में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स से जुड़े चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि जिस पुलिस पर नशे को रोकने की जिम्मेदारी है, वही ड्रग माफिया के साथ मिली हुई पाई गई। उन्होंने दावा किया कि इन पुलिसकर्मियों ने करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए, लेकिन आरोपियों को सजा नहीं दिलाई गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह सिंथेटिक ड्रग्स के फैलाव को रोकने के लिए ठोस और व्यापक रणनीति बनाए, जो केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित न हो, बल्कि दूरदराज इलाकों में भी प्रभावी ढंग से लागू हो।

इस बहस के दौरान ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि नशे से जुड़े मामलों में तैनात पुलिसकर्मियों की ईमानदारी की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील पदों पर केवल ईमानदार अधिकारियों को ही तैनात किया जाना चाहिए, जिससे पुलिस की छवि बनी रहे और ड्रग माफिया को किसी तरह का संरक्षण न मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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