बजट सत्र : राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक

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बजट सत्र : राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोक-झोंक


शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शिमला में चल रहे बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गुरूवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस और तीखी नोंकझोंक देखने को मिली। चर्चा के दौरान पुराने राजनीतिक विवाद, कानून व्यवस्था, गारंटियां और वित्तीय मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए, जिससे सदन का माहौल कई बार गर्म हो गया।

उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए पूर्व भाजपा सरकार के समय राज्यपाल के विरोध के दौरान उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर में विधायकों को विशेषाधिकार प्राप्त होता है और वहां उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने गलत परंपरा शुरू की और विधानसभा अध्यक्ष से इस पर स्पष्ट व्यवस्था देने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि एफआईआर इसलिए दर्ज हुई थी क्योंकि अग्निहोत्री और अन्य नेताओं ने राज्यपाल का रास्ता रोका और उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। ठाकुर ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की घटना देश के किसी भी राज्य में पहले नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के तहत कार्रवाई की गई और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी अग्निहोत्री के तर्कों का विरोध किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। इस दौरान अग्निहोत्री ने कहा कि अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी हंगामे और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं, लेकिन वहां एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में न तो कांग्रेस की गारंटियों का जिक्र है और न ही व्यवस्था परिवर्तन का। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानून व्यवस्था संभालने में विफल रही है और अभी तक स्थायी मुख्य सचिव और डीजीपी की नियुक्ति नहीं कर पाई है। शर्मा ने मुख्यमंत्री पर टकराव की राजनीति करने और मीडिया की स्वतंत्रता पर असर डालने के भी आरोप लगाए।

विधायक राकेश जमवाल ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार के कामकाज का आईना होता है, लेकिन इसमें पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गारंटियों के नाम पर जनता को गुमराह किया और सत्ता हासिल की। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और अधूरे विकास कार्यों का मुद्दा भी उठाया।

वहीं, विधायक हंस राज ने कहा कि आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) केवल हिमाचल में ही नहीं, बल्कि 17 राज्यों में बंद हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने संसाधन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और लंबे समय की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल का अपना शिक्षा बोर्ड सक्षम है और इसे मजबूत करने की जरूरत है।

चर्चा में मोहनलाल ब्राक्टा, विनोद सुल्तानपुरी, हरदीप सिंह बाबा, बलबीर वर्मा, डॉ. जनक राज, लोकेंद्र कुमार, केवल सिंह पठानिया और विवेक शर्मा ने भी अपने विचार रखे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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