बजट सत्र : हिमाचल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू, पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक

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बजट सत्र : हिमाचल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू, पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक


शिमला, 18 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर कई आरोप लगाए, वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी पलटवार करते हुए भाजपा सरकार के कार्यकाल को निशाने पर लिया।

चर्चा के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा को सत्ता में आने पर काम करने में आनंद आता है, जबकि मौजूदा सरकार पहले से चल रहे कामों को बंद करने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में लोगों की जरूरत और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संस्थान खोले थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही करीब दो हजार सरकारी संस्थान बंद कर दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हिमकेयर और सहारा जैसी योजनाएं, जो लोगों के लिए राहत का काम कर रही थीं, अब लगभग बंद हो चुकी हैं। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस की चुनावी गारंटियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अब तक एक भी गारंटी पूरी नहीं कर पाई है। उन्होंने महिला सम्मान निधि का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने केवल करीब 35,500 महिलाओं को ही एक किश्त दी है, जबकि वादा सभी महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने का था।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक क्षेत्र विकास निधि की बची हुई राशि जारी करने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक केवल एक ही किश्त जारी की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में उपलब्धियों के नाम पर कुछ खास नहीं बता पा रही है, यही वजह है कि राज्यपाल के अभिभाषण में भी सरकार अपनी उपलब्धियों को नहीं गिना सकी।

जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण बहुत छोटा रहा, जिससे यह साफ होता है कि सरकार के पास बताने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है।

इन आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को राजनीति में खींचने की कोशिश कर रही है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी मुआवजे के रूप में करीब 70 हजार करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसके बावजूद राज्य का कर्ज कम नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रदेश पर करीब 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल का अधिकार है और इसे बहाल करने के लिए भाजपा को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने हिमकेयर और सहारा योजनाओं के तहत पूर्व और वर्तमान सरकार के समय लाभान्वित लोगों का भी ब्योरा सदन में रखा।

इससे पहले कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि सरकार को अपने तीन साल के कार्यकाल में प्राकृतिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के जरिए हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करना राज्य के लिए नुकसानदायक है। वहीं, विधायक राम कुमार ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है और 70 आदर्श स्वास्थ्य संस्थान शुरू किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर विधायक सुदर्शन बबलू ने भाजपा पर राज्य के हितों के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया, जबकि विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि हिमाचल को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और हमेशा केंद्र पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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