हिमाचल बजट 2026–27: दूध के दाम 10 रुपये बढ़े, किसानों के लिए एमएसपी बढ़ोतरी, अधूरे कामों को 500 करोड़, बजट आकार घटकर 54,928 करोड़
शिमला, 21 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 का बजट पेश करते हुए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने किसानों, दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई फैसलों का ऐलान किया। साथ ही बताया कि इस बार राज्य का कुल बजट आकार घटाकर 54,928 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले बजट के लगभग 58 हजार करोड़ रुपये के बजट से कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) में कमी इसके पीछे एक बड़ी वजह है।
मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश को आरडीजी के रूप में करीब 48 हजार करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन वित्त आयोग के नए मानकों के कारण प्रदेश को हर साल लगभग 8,105 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह अनुदान आगामी वर्षों में कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होना चाहिए था, ताकि पहाड़ी राज्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने गाय और भैंस के दूध के क्रय मूल्य में 10–10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। इसके तहत अब गाय के दूध का क्रय मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का क्रय मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिले और बिचौलियों की भूमिका कम हो।
किसानों के लिए भी सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो, मक्की का समर्थन मूल्य 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो, पांगी क्षेत्र के जौ का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो और हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो करने की घोषणा की। इसके अलावा पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य देने का भी एलान किया गया। मुख्यमंत्री ने एक और चुनावी गारंटी पूरी करने का दावा करते हुए राज्य किसान आयोग के गठन की घोषणा की, जो किसानों की समस्याओं को सुनने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए काम करेगा।
मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने लंबे समय से लंबित पड़े करीब 300 अधूरे विकास कार्यों की सूची तैयार की है। ये परियोजनाएं जनहित से जुड़ी हैं और इनके पूरा होने से विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी। इन अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू की थी, जो कर्मचारियों के हित में लिया गया फैसला था। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गोबर खाद योजना शुरू की गई और मक्की व हल्दी को समर्थन मूल्य देने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम शुरू करने का फैसला भी लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में नीतियों में बदलाव कर खर्च कम करने और आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए हैं और सरकार अपनी 10 चुनावी गारंटियों को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश की विकास गति को धीमा नहीं होने दिया जाएगा और हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।
बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के समय बिना पर्याप्त योजना के कई भवन बनाए गए, जो अब खाली पड़े हैं। सरकार ने इन भवनों को विभिन्न विभागों को उपयोग के लिए देना शुरू कर दिया है और इन्हें सामुदायिक कार्यों में इस्तेमाल करने की भी योजना है।
मुख्यमंत्री ने सेब उत्पादकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सेब पर आयात शुल्क कम किए जाने से प्रदेश के बागवान प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025–26 में प्रदेश की विकास दर 8.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राज्य की अर्थव्यवस्था में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.83 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

