हिमाचल विधानसभा में दल बदल विरोधी कानून से जुड़ा विधेयक पारित, भाजपा ने किया विरोध

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हिमाचल विधानसभा में दल बदल विरोधी कानून से जुड़ा विधेयक पारित, भाजपा ने किया विरोध


हिमाचल विधानसभा में दल बदल विरोधी कानून से जुड़ा विधेयक पारित, भाजपा ने किया विरोध


शिमला, 02 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दल बदल से जुड़े मामलों पर विधायकों की पेंशन को लेकर लाया गया संशोधन विधेयक गुरुवार को विपक्षी दल भाजपा के कड़े विरोध के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के तहत दल बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए कुछ विधायकों को पेंशन से वंचित किए जाने का प्रावधान किया गया है।

विधानसभा में पारित हुए इस संशोधन के बाद गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ के पूर्व विधायक देवेंद्र भुट्टो को पेंशन नहीं मिलेगी। इसके अलावा रवि ठाकुर और राजेंद्र राणा को भी 14वीं विधानसभा की पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि इंद्रदत्त लखनपाल पर इस संशोधन का प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे दोबारा विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंच चुके हैं।

यह संशोधन विधेयक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक दिन पहले सदन में पेश किया था। आज इस पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल भाजपा ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से लाया गया विधेयक बताया और इसे वापस लेने की मांग की। इसके बावजूद सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनि मत से पारित करवा लिया। सरकार का कहना है कि यह संशोधन 14वीं विधानसभा तथा इसके बाद चुने जाने वाले विधायकों पर लागू होगा।

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि यह विधेयक राजनीतिक बदले की भावना से लाया गया है और अदालत में टिक नहीं पाएगा। उनका कहना था कि किसी भी कानून को पिछली तारीख से लागू करना उचित नहीं होता और इससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य केवल चार विधायकों की पेंशन रोकना है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी कहा कि दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करना सही कदम है, लेकिन इसके लिए पिछली तारीख से कानून लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में राजनीतिक प्रतिशोध की स्थिति बन गई है और संबंधित विधायकों तथा उनके परिवारों पर कई मामलों में कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि यदि यह कानून अदालत में चुनौती दी जाती है तो इसके टिकने की संभावना कम है।

भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने चर्चा के दौरान कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब चुनावी विवादों के बावजूद पूर्व विधायकों को पेंशन और अन्य लाभ मिलते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक बनने के बाद मिलने वाले लाभ भविष्य के फैसलों के आधार पर नहीं रोके जाने चाहिए।

वहीं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दल बदल की प्रवृत्ति को रोकना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह आरोप गलत है कि सरकार किसी राजनीतिक भावना से यह संशोधन ला रही है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी कहा कि यह विधेयक सोच-समझकर लाया गया है और विपक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि वह दल बदल का समर्थन करता है या विरोध।

चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह विधेयक किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं है बल्कि उन मामलों के लिए है जहां विधायक जनता की भावना के विपरीत दल बदल करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में प्रदेश में सरकार को गिराने से जुड़े घटनाक्रम को प्रदेश की जनता ने देखा है और उसी संदर्भ में यह संशोधन लाया गया है। उन्होंने भाजपा के विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि यह विधेयक मौजूदा विधानसभा के कार्यकाल के बाद लागू होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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