बीबीएमबी में हिमाचल के हक की लड़ाई पर सत्ता-विपक्ष एकजुट, सदन में प्रस्ताव पर लगी मुहर

WhatsApp Channel Join Now
बीबीएमबी में हिमाचल के हक की लड़ाई पर सत्ता-विपक्ष एकजुट, सदन में प्रस्ताव पर लगी मुहर


शिमला, 27 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं में राज्य के अधिकारों के मुद्दे पर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक साथ नजर आए। विपक्ष की ओर से लाए गए संकल्प पर सदन ने मुहर लगा दी। संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को कहा कि हिमाचल अपने जल संसाधनों पर अधिकार से पीछे नहीं हटेगा और प्रदेश के हित से जुड़े मुद्दे केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल अपनी शर्तें मनवाने में सफल रहा है और अब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई अगला बड़ा मुद्दा है।

बीबीएमबी से पानी उठाने के लिए एनओसी की जरूरत नहीं :सुक्खू

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पीने के पानी और सिंचाई के लिए बीबीएमबी से पानी उठाने में अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान कुल्लू आए ऊर्जा सचिव आरके सिंह के सामने भी यह मामला उठाया गया था, जिसके बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्त हटा दी गई। अब प्रदेश के अन्य बांधों से पानी उठाने के लिए भी अनापत्ति प्रमाण पत्र की अनिवार्यता खत्म करने का मामला केंद्र सरकार के सामने उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी से हिमाचल के करीब 4,200 करोड़ रुपये के लंबित बकाये का मुद्दा भी केंद्र के सामने उठाया जाएगा। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रदेश को उसके वैधानिक हिस्से से जुड़े लाभ पूरी तरह नहीं मिले हैं।

12 फीसदी रॉयल्टी और लाडा अधिकारों पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं से हिमाचल को वर्तमान में 12 फीसदी रॉयल्टी मिल रही है। परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकार भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं। पांच मेगावाट से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं की अंतिम लागत का 1.5 फीसदी और पांच मेगावाट तक की परियोजनाओं की अंतिम लागत का एक फीसदी स्थानीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण कोष में दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में 24,567 मेगावाट जलविद्युत क्षमता है, जिसमें से 12,438.63 मेगावाट का दोहन हो चुका है। प्रदेश में 188 जलविद्युत परियोजनाएं स्थापित हैं और 54 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। सरकार पानी को प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

बांध परियोजनाओं को खनन सामग्री उठाने की अनुमति नहीं

सुक्खू ने कहा कि बांध परियोजनाओं के संचालकों को परियोजना क्षेत्रों से खनन सामग्री उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए सरकार कानून लाएगी। नियम तोड़ने पर मामले दर्ज होंगे और सामग्री की नीलामी सरकार खुद करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला स्थित ऊर्जा निगम के कार्यालय को मंडी स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए मंडी में बीबीएमबी की करीब 45 बीघा खाली जमीन के इस्तेमाल की संभावना है। बांध परियोजना क्षेत्रों के आसपास खाली पड़ी जमीन को प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में लेने के लिए भी कानून बनाने की बात कही गई है। उन्होंने चंबा जिला में स्थानीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की घोषणा की और कहा कि वह परियोजना प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस समय ये मुद्दे उठाए जाते तो प्रदेश के हित में बेहतर होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रदेश हित का कोई भी मुद्दा उठाएगा तो सरकार उसे गंभीरता से लेगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story