हिमाचल के 17 निजी विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा, हर संस्थान में नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश

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हिमाचल के 17 निजी विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा, हर संस्थान में नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश


शिमला, 12 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाब और चंडीगढ़ के विश्वविद्यालयों में हाल में हुई घटनाओं के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर पुलिस मुख्यालय शिमला में सोमवार को पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा मजबूत करने, छात्रावासों में निगरानी बढ़ाने, अफवाहों पर रोक लगाने और आपात स्थितियों में तुरंत कार्रवाई के लिए पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई।

बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय एक नोडल सुरक्षा अधिकारी नामित करेगा। यह अधिकारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के लगातार संपर्क में रहेगा। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर परिसरों की सुरक्षा का ऑडिट करेंगे और आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तैयार करेंगे।

बैठक की शुरुआत पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में हुई हालिया घटनाओं पर प्रस्तुति से हुई। इन घटनाओं से सबक लेते हुए हिमाचल के शिक्षण संस्थानों में ऐसी परिस्थितियों को रोकने और किसी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई।

विश्वविद्यालयों में प्रवेश और निकास द्वारों की निगरानी, आगंतुकों के सत्यापन और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। निजी सुरक्षा कर्मियों का पुलिस सत्यापन कराने और उन्हें नियमित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी बेहतर की जाएगी।

बैठक में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शिमला, सोलन, मंडी, बद्दी, कांगड़ा और ऊना के पुलिस अधीक्षकों ने हिस्सा लिया। इनके अलावा आईजी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, डीआईजी दक्षिणी रेंज, डीआईजी कानून एवं व्यवस्था और प्रथम भारतीय आरक्षित वाहिनी के कमांडेंट भी मौजूद रहे।

सोशल मीडिया पर अफवाहें रोकने के लिए हर विश्वविद्यालय में अधिकृत प्रवक्ता

बैठक में तय किया गया कि किसी घटना के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए विश्वविद्यालय पुलिस के साइबर क्राइम और मीडिया प्रकोष्ठ के संपर्क में रहेंगे। प्रत्येक विश्वविद्यालय एक अधिकृत प्रवक्ता नामित करेगा, जो घटनाओं से संबंधित सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराएगा।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। परिसरों और उनके आसपास नशे से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

पुलिस महानिदेशक ने विश्वविद्यालयों से यातायात स्वयंसेवक योजना शुरू करने, विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने का आग्रह किया। पुलिस और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को स्थायी रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन करने की संभावना पर भी चर्चा हुई।

112 और छात्राओं के लिए 'ट्रैक मी' सुविधा की जानकारी देने पर जोर

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को इस सेवा और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध 'ट्रैक मी' सुविधा के बारे में जागरूक करने को कहा। विद्यार्थियों और शिक्षकों से पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़ने की अपील भी की गई।

डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक विद्यार्थी खुद को सुरक्षित महसूस करे और अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा पर भरोसा रहे। उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रयास ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले ही रोका जा सके।

उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और उन्हें नशे तथा साइबर अपराधों से बचाने को साझा जिम्मेदारी बताया। साथ ही विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन से किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी समस्या की सूचना तुरंत 112 पर देने की अपील की।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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