हिमाचल में निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को देना होगा खर्च का हिसाब

WhatsApp Channel Join Now
हिमाचल में निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को देना होगा खर्च का हिसाब


शिमला, 22 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों का शोर भले थम गया हो, लेकिन चुनाव लड़ने वाले 1147 उम्मीदवारों के लिए अब एक और अहम पड़ाव बाकी है। वोट मांगने के दौरान कितना पैसा खर्च हुआ, किस काम पर कितना खर्च किया गया और पूरा हिसाब क्या है, इसकी जानकारी अब राज्य चुनाव आयोग को देनी होगी।

आयोग ने साफ कर दिया है कि यह नियम सिर्फ जीतने वालों पर नहीं, चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों पर भी बराबर लागू होगा।

राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक चुनाव परिणाम घोषित होने के एक महीने के भीतर सभी उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्यौरा जमा करवाना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

आयोग के नियमों के तहत ऐसे प्रत्याशियों को पांच साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है। यानी चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के लिए अब असली चुनौती अपने खर्च का पूरा हिसाब देने की है।

प्रदेश में 51 शहरी निकायों के चुनाव हुए हैं। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए कुल 1147 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। चुनाव प्रचार के दौरान खर्च की सीमा भी तय की गई थी। नगर निगम चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अधिकतम एक लाख रुपये तक खर्च कर सकते थे। वहीं नगर परिषद चुनाव में 75 हजार रुपये और नगर पंचायत चुनाव में 50 हजार रुपये तक खर्च की अनुमति थी। चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान खर्च पर नजर रखने के लिए व्यय प्रेक्षक भी तैनात किए थे।

अधिकांश निकायों के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं और अब उम्मीदवारों के पास खर्च का हिसाब जमा करने के लिए 27 दिन का समय बचा है। बाकी शहरी निकायों के उम्मीदवारों को 16 जून तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी, जबकि नगर निगम चुनावों के परिणाम 31 मई को घोषित होने हैं। वहां चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को 30 जून तक खर्च का पूरा विवरण देना होगा।

यह पहली बार नहीं है जब चुनाव खर्च को लेकर सख्ती दिखाई गई हो। इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने 24 नवंबर 2023 को नगर निगम शिमला चुनाव से जुड़े नौ उम्मीदवारों को पांच साल के लिए अयोग्य घोषित किया था।

इन उम्मीदवारों ने तय समय के भीतर अपने चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं किया था। बाद में ऐसे उम्मीदवारों की सूची जिला प्रशासन की वेबसाइटों पर भी जारी की गई थी, ताकि वे अगले पांच वर्षों तक कोई चुनाव न लड़ सकें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story