हिमाचल में तीन साल में 885 सरकारी स्कूलों पर लगा ताला, शिमला में सबसे अधिक 271 विद्यालय बंद

WhatsApp Channel Join Now
हिमाचल में तीन साल में 885 सरकारी स्कूलों पर लगा ताला, शिमला में सबसे अधिक 271 विद्यालय बंद


शिमला, 29 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में कम नामांकन वाले 885 सरकारी स्कूल पिछले तीन वर्षों में बंद किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 271 विद्यालय शिमला जिले के हैं। सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार एक अगस्त 2026 तक शून्य या बेहद कम विद्यार्थियों वाले विद्यालयों को बंद करने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बंद किए गए 885 विद्यालयों में 661 प्राथमिक, 191 माध्यमिक, 19 उच्च और 14 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य या बहुत कम थी।

जिलावार आंकड़ों में शिमला के बाद मंडी में 161 और कांगड़ा में 127 विद्यालय बंद किए गए हैं। चंबा और लाहौल-स्पीति में 53-53, किन्नौर में 43, कुल्लू में 42 और सिरमौर में 39 विद्यालय बंद हुए हैं। सोलन और हमीरपुर में 29-29, बिलासपुर में 25 और ऊना में 13 विद्यालय बंद किए गए हैं।

सरकार के अनुसार स्कूलों को बंद करने के फैसले में कम नामांकन के साथ आसपास दूसरे विद्यालय की उपलब्धता को भी देखा गया। सरकार का तर्क है कि बहुत कम विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में शिक्षक, भवन और अन्य संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था।

इसके अलावा 641 विद्यालयों को आसपास के दूसरे विद्यालयों में मिलाया गया या डाउनग्रेड किया गया है। इन विद्यालयों में पांच या उससे कम विद्यार्थियों का नामांकन था और नजदीक दूसरा विद्यालय उपलब्ध था। प्राथमिक विद्यालयों के लिए दो किलोमीटर, माध्यमिक विद्यालयों के लिए तीन किलोमीटर, उच्च विद्यालयों के लिए पांच किलोमीटर और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के लिए दस किलोमीटर के दायरे में दूसरे विद्यालय की उपलब्धता को विलय का आधार बनाया गया।

641 विद्यालयों के विलय या डाउनग्रेड के मामले में कांगड़ा में 151, शिमला में 126 और मंडी में 115 विद्यालय शामिल हैं। बिलासपुर में 51, सिरमौर में 38, हमीरपुर में 34, चंबा में 33, सोलन में 28, ऊना में 20, किन्नौर में 19, कुल्लू में 18 और लाहौल-स्पीति में आठ विद्यालय इस प्रक्रिया में शामिल किए गए।

सरकार का कहना है कि कम विद्यार्थियों वाले विद्यालयों को बंद या आसपास के स्कूलों में मिलाने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। तीन वर्षों में 885 विद्यालय बंद किए जाने और 641 विद्यालयों के विलय या डाउनग्रेड होने से कुल 1,526 सरकारी विद्यालय इस प्रक्रिया के दायरे में आए हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story