हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध पंचायतों में जनजातीय जिला किन्नौर अव्वल, साक्षर जिला हमीरपुर सबसे फिसड्डी

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हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध पंचायतों में जनजातीय जिला किन्नौर अव्वल, साक्षर जिला हमीरपुर सबसे फिसड्डी


शिमला, 20 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के बीच इस बार निर्विरोध निर्वाचन ने खास चर्चा बटोरी है। राज्य की कुल 3754 ग्राम पंचायतों में से 131 पंचायतों का निर्विरोध चयन हुआ है, यानी करीब 3.49 फीसदी पंचायतों में बिना मतदान ही प्रतिनिधि चुन लिए गए। दिलचस्प बात यह है कि जनजातीय जिला किन्नौर निर्विरोध निर्वाचन में पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा, जबकि उच्च साक्षरता दर के लिए पहचाना जाने वाला हमीरपुर जिला इस मामले में सबसे पीछे रहा, जहां एक भी पंचायत निर्विरोध नहीं चुनी गई।

राज्य निर्वाचन आयोग हिमाचल प्रदेश के आंकड़ों के अनुसार किन्नौर जिले में कुल 80 पंचायतों में से 18 पंचायतों का निर्विरोध चयन हुआ है। यह जिले की कुल पंचायतों का करीब 22.50 फीसदी है, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके बाद अन्य जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति दूसरे स्थान पर रहा, जहां कुल 48 पंचायतों में से 5 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं। यहां निर्विरोध निर्वाचन की दर करीब 10.42 फीसदी रही।

शिमला जिले में कुल 441 पंचायतों में से 42 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं। संख्या के लिहाज से यह प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रतिशत के आधार पर यहां करीब 9.52 फीसदी पंचायतें बिना मुकाबले चुनी गईं। इसके बाद सिरमौर में कुल 273 पंचायतों में से 22 पंचायतों का निर्विरोध चयन हुआ, जो करीब 8.06 फीसदी है। सोलन जिले में कुल 255 पंचायतों में से 13 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं और यहां यह प्रतिशत करीब 5.10 फीसदी रहा।

मंडी जिले में कुल 577 पंचायतों में से 17 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं। यहां यह आंकड़ा करीब 2.95 फीसदी रहा। कुल्लू में कुल 246 पंचायतों में से 5 पंचायतें बिना मुकाबले चुनी गईं और यहां प्रतिशत करीब 2.03 फीसदी बैठा। ऊना में कुल 249 पंचायतों में से 5 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं, जो करीब 2.01 फीसदी है।

बिलासपुर में कुल 182 पंचायतों में से केवल एक पंचायत निर्विरोध चुनी गई, जहां प्रतिशत करीब 0.55 फीसदी रहा। चंबा जिले में कुल 319 पंचायतों में से सिर्फ एक पंचायत निर्विरोध चुनी गई और यहां यह आंकड़ा करीब 0.31 फीसदी रहा। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में कुल 846 पंचायतों में से केवल 2 पंचायतों का निर्विरोध चयन हुआ। यहां यह प्रतिशत महज 0.24 फीसदी रहा। वहीं हमीरपुर जिले की कुल 242 पंचायतों में एक भी पंचायत निर्विरोध नहीं चुनी गई।

किन्नौर में निर्विरोध निर्वाचन के पीछे सामाजिक सहमति और गांवों में एकजुटता बनाए रखने की सोच को बड़ी वजह माना जा रहा है। खासकर पूह ब्लॉक में एक-तिहाई पंचायतों में सर्वसम्मति से प्रतिनिधि चुने गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत चुनाव कई बार गांवों और परिवारों में खींचतान पैदा कर देते हैं, इसलिए आपसी सहमति से प्रतिनिधि चुनने को प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार की ओर से निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा ने भी गांवों को इसके लिए प्रेरित किया।

किन्नौर की रिब्बा पंचायत में पूर्व प्रधान राधिका को उपप्रधान और वार्ड सदस्यों के साथ सर्वसम्मति से चुना गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव में राजनीतिक खींचतान खत्म करने और विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए यह फैसला लिया गया। चांगो पंचायत में भी निर्विरोध निर्वाचन की परंपरा लगातार जारी है। यहां पहले भी पंचायत सर्वसम्मति से चुनी जाती रही है। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि निर्विरोध चुने गए प्रतिनिधियों पर पूरे गांव के प्रति ज्यादा जिम्मेदारी होती है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नामांकन वापसी के बाद पूरे प्रदेश में कुल 10,854 प्रतिनिधि निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें 176 प्रधान, 286 उपप्रधान, 10,307 वार्ड सदस्य और 85 पंचायत समिति सदस्य यानी बीडीसी सदस्य शामिल हैं। पूरे प्रदेश में एक भी जिला परिषद सदस्य निर्विरोध नहीं चुना गया है।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3754 प्रधान पदों में से 176 प्रधान बिना मुकाबले निर्वाचित हुए हैं, जो करीब 4.69 फीसदी है। उपप्रधान पदों पर 3754 सीटों में से 286 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जो करीब 7.62 फीसदी है। सबसे ज्यादा निर्विरोध निर्वाचन वार्ड सदस्य पदों पर हुआ है। राज्य की 21,654 वार्ड सदस्य सीटों में से 10,307 उम्मीदवार बिना मुकाबले निर्वाचित हुए हैं, जो करीब 47.60 फीसदी बैठता है। पंचायत समिति सदस्य यानी बीडीसी के 1769 पदों में से 85 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जो करीब 4.81 फीसदी है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को होंगे। प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य पदों की मतगणना मतदान वाले दिन मतदान समाप्त होने के बाद होगी, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना 31 मई को की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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