हिमाचल प्रदेश में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, आधी रात से 60 पैसे प्रति लीटर का उपकर लागू

WhatsApp Channel Join Now
हिमाचल प्रदेश में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, आधी रात से 60 पैसे प्रति लीटर का उपकर लागू


शिमला, 12 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल अब महंगा हो गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद मंगलवार मध्यरात्रि से दोनों ईंधनों पर 60 पैसे प्रति लीटर का ‘अनाथ एवं विधवा उपकर’ लागू हो गया है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है। सरकार का कहना है कि इस उपकर से मिलने वाली पूरी राशि अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए इस्तेमाल की जाएगी। वहीं, पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए ईंधन की कीमत में यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त खर्च है।

शिमला में पेट्रोल की कीमत अब 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे पहले यहां पेट्रोल 102.45 रुपये प्रति लीटर था। यानी कीमत में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की कीमत 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ी है। नई व्यवस्था के तहत यह उपकर पेट्रोल पंप पर हर बिक्री के समय अलग से वसूल नहीं किया जाएगा। राज्य में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पहली बिक्री के समय 60 पैसे प्रति लीटर की दर से इसकी वसूली होगी।

सरकार ने इस उपकर के लिए राज्य कर एवं आबकारी विभाग के माध्यम से अधिसूचना जारी की है। इसमें साफ किया गया है कि पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर पहली बिक्री के समय उपकर लगाया जाएगा। इससे मिलने वाली रकम अलग ‘अनाथ एवं विधवा वेलफेयर फंड’ में जमा होगी। इस फंड का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए किया जाएगा।

इस उपकर का प्रावधान हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2026 में किया गया है। यह विधेयक इसी साल विधानसभा के बजट सत्र में पारित हुआ था। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अप्रैल 2026 में प्रभावी हुआ। कानून में सरकार को पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अधिकतम पांच रुपये प्रति लीटर तक उपकर लगाने का अधिकार दिया गया है। इसकी वास्तविक दर सरकार अधिसूचना के जरिए तय कर सकती है। फिलहाल सरकार ने इसकी दर 60 पैसे प्रति लीटर तय की है।

सरकार के मुताबिक, हिमाचल में अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं के लिए अलग और स्थायी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में संबंधित विधेयक पेश करते समय कहा था कि इस उपकर से जुटाए गए संसाधनों का इस्तेमाल अनाथ बच्चों और विधवाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।

हालांकि, ईंधन की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल-डीजल भरवाने तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की कई सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब आम लोग पहले से बढ़ते खर्च का सामना कर रहे हैं, पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त उपकर उनके बजट पर एक और छोटा बोझ जोड़ता है। सरकार का तर्क है कि इससे मिलने वाली पूरी राशि समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण पर खर्च होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story