पंचायत चुनाव : शिमला में 49 नामांकन रद्द, 8613 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
शिमला, 13 मई (हि.स.)। शिमला जिले में पंचायत चुनाव की तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद 49 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 15 नामांकन प्रधान पद के उम्मीदवारों के खारिज हुए हैं। इसके अलावा उपप्रधान पद के 10, वार्ड सदस्य पद के 22 और पंचायत समिति सदस्य पद के 2 उम्मीदवारों के नामांकन भी जांच में अमान्य पाए गए। जिला परिषद सदस्य पद के सभी नामांकन सही पाए गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नामांकन खारिज होने के बाद अब जिले में कुल 8613 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाएंगे। प्रधान पद के लिए कुल 2121 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से 15 रद्द होने के बाद अब 2106 उम्मीदवार मैदान में हैं। उपप्रधान पद के लिए 1854 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें 10 रद्द होने के बाद 1844 उम्मीदवार बचे हैं।
वार्ड सदस्य पद के लिए सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिला। इस पद के लिए 3802 नामांकन दाखिल किए गए थे। जांच में 22 नामांकन रद्द होने के बाद अब 3780 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 759 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से 2 नामांकन रद्द होने के बाद 757 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। जिला परिषद सदस्य पद के लिए दाखिल सभी 126 नामांकन वैध पाए गए हैं और सभी उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे।
जिले में तीन दिन चली नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 8662 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे। जांच के बाद 49 नामांकन रद्द होने से मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। कई पंचायतों में सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा, जबकि कई जगहों पर बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को होंगे। प्रदेश में कुल 31,182 पदों के लिए मतदान कराया जाएगा। इनमें 3,754 प्रधान, 3,754 उपप्रधान, 21,654 वार्ड सदस्य, 1,769 बीडीसी सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्य पदों की मतगणना मतदान के तुरंत बाद होगी, जबकि जिला परिषद और बीडीसी चुनाव की मतगणना 31 मई को की जाएगी।
इन चुनावों में 50 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। करीब 52 हजार युवा पहली बार वोट डालेंगे, जिनमें लगभग 23 हजार महिलाएं शामिल हैं। पूरे प्रदेश में 21,678 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लांगजा स्थित कामो पाठशाला में 4,587 मीटर की ऊंचाई पर प्रदेश का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र बनाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

