हिमाचल में अफसरशाही को इस माह से कम वेतन, 30 और 20 फीसदी वेतन स्थगित करने की अधिसूचना जारी
शिमला, 19 अप्रैल (हि.स.)। राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों सहित कई श्रेणियों के अफसरों के वेतन के एक हिस्से को छह महीने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लागू कर दिया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह स्थगन अप्रैल 2026 के वेतन से प्रभावी होगा जो मई 2026 में देय होगा।
जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (एचओएफएफ), प्रधान मुख्य अरण्यपाल और अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल स्तर के अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा अगले छह महीनों के लिए स्थगित रहेगा। वहीं सचिव, विभागाध्यक्ष, पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक स्तर तक के अधिकारी, मुख्य अरण्यपाल, अरण्यपाल और डीएफओ स्तर तक के अन्य वन अधिकारियों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित किया गया है।
सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि वेतन के देय और स्थगित हिस्से को ई-सैलरी प्रणाली और वेतन पर्चियों में अलग-अलग दिखाया जाएगा, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे और संबंधित अधिकारियों को पूरी जानकारी मिलती रहे। साथ ही यह भी कहा गया है कि स्थगित वेतन का हिस्सा पेंशन, अवकाश नकदीकरण और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल माना जाएगा और इस संबंध में लागू नियमों के अनुसार ही इसका लाभ दिया जाएगा।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आयकर, एनपीएस, यूपीएस और जीपीएफ अंशदान सहित सभी वैधानिक कटौतियां पहले की तरह पूर्ण वेतन राशि पर ही लागू रहेंगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की लेखा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो। हालांकि स्थगित की जाने वाली राशि की गणना कर भुगतान, अंशदान और अन्य निश्चित कटौतियों के बाद बची शुद्ध वेतन राशि के आधार पर की जाएगी।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार से अनुदान या बजटीय सहायता प्राप्त करने वाले बोर्ड, निगम, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त निकाय, विश्वविद्यालय और प्रमुख सोसाइटियां भी इस निर्णय को अपनाएं और अपने स्तर पर इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करें।
जिन कर्मचारियों के वेतन से किसी प्रकार के ऋण की किस्तें कट रही हैं, उनके लिए भी अधिसूचना में विशेष व्यवस्था की गई है। ऐसे कर्मचारी निर्धारित प्रारूप में ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर को लिखित सहमति दे सकते हैं। सहमति देने के बाद उनकी ऋण किस्तों की कटौती के पश्चात बची वेतन राशि के आधार पर ही स्थगन की गणना की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थगित वेतन का हिस्सा किसी प्रकार की स्थायी कटौती नहीं माना जाएगा। यह राशि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर बाद में जारी की जाएगी। सरकार ने इसे अस्थायी कदम बताते हुए सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण के दौरान ही इन श्रेणियों के अधिकारियों के वेतन के एक हिस्से को छह महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा की थी। इसी बजट भाषण में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और विधायकों के वेतन का 50 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित करने का भी ऐलान किया गया था। इस संबंध में एक दिन पहले ही अधिसूचना जारी कर जनप्रतिनिधियों के वेतन स्थगन के फैसले को भी इसी माह से लागू कर दिया गया है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में अधिकारियों के वेतन में तीन प्रतिशत अतिरिक्त स्थगन की घोषणा भी की थी, लेकिन बाद में 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस के अवसर पर इस फैसले को वापस लेने की घोषणा कर दी गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

