हिमाचल में बनेगी पोषण नीति, आईजीएमसी से शुरू होगा मरीजों के डेटा का डिजिटलीकरण

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हिमाचल में बनेगी पोषण नीति, आईजीएमसी से शुरू होगा मरीजों के डेटा का डिजिटलीकरण


शिमला, 12 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार 31 मई तक राज्य की पोषण नीति तैयार करेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसके लिए समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि “फिट हिमाचल” के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। सरकार का दावा है कि हिमाचल प्रदेश व्यापक पोषण नीति तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।

सोमवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होना चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार पंजीकरण कराने और जांच रिपोर्ट की कागजी प्रतियां संभालने की परेशानी से राहत मिल सके। इसके लिए मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी शिमला में पायलट परियोजना शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इस परियोजना के तहत पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइकोलॉजी, बायो-केमिस्ट्री और फार्मेसी विभागों के मरीजों का पूरा डेटा डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि इस काम के लिए जरूरी जनशक्ति उपलब्ध करवाई जाए। सरकार की योजना है कि पहले आईजीएमसी में यह व्यवस्था लागू की जाए और उसके बाद इसे अस्पताल के सभी विभागों और फिर प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों तक बढ़ाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक मशीनों और स्वास्थ्य उपकरणों पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा तीन मेडिकल कॉलेजों में स्वचालित लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की सीटें भी दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार ये डॉक्टर अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के बेहतर संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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