हिमाचल के मंदिरों में दान की सुरक्षा पर सख्ती, सुक्खू सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

WhatsApp Channel Join Now
हिमाचल के मंदिरों में दान की सुरक्षा पर सख्ती, सुक्खू सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश


शिमला, 11 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी स्वामित्व वाले और सरकार द्वारा प्रबंधित मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान, नकदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सूक्खु सरकार ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे अन्य मंदिरों में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कराएं, जो जिला प्रशासन के सीधे नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन राज्य कानून के तहत गठित ट्रस्टों या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित समितियों के माध्यम से संचालित होते हैं। अन्य मंदिरों की प्रबंधन समितियों को भी बेहतर सुरक्षा व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है।

सरकार ने कहा है कि हिमाचल देवभूमि है, जहां माता चिंतपूर्णी, नैना देवी, ज्वालाजी, ब्रजेश्वरी और बाबा बालक नाथ सहित कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। किन्नौर कैलाश, मणिमहेश, श्रीखंड महादेव, लमदल और सरयोलसर जैसे तीर्थों में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और आस्था के रूप में दान देते हैं। हाल में देश के एक प्रमुख मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित चोरी तथा गड़बड़ी की खबरों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

दानपात्र, गिनती और सीसीटीवी निगरानी के लिए नए नियम

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी दानपात्र छेड़छाड़ से सुरक्षित हों और उन्हें मजबूती से स्थापित किया जाए। हर दानपात्र को अलग पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी चाबियां ड्यूल लॉक या मल्टी-की प्रणाली के तहत रखी जाएंगी। किसी भी मरम्मत या बदलाव का रिकॉर्ड तैयार होगा। दानपात्र केवल तय तिथि पर अधिकृत समिति की मौजूदगी में खोले जाएंगे। दान की गिनती कार्यकारी अधिकारी या मंदिर अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। गिनती कक्ष सीसीटीवी निगरानी में रहेगा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वार, दानपात्र, गिनती कक्ष, ट्रेजरी, स्ट्रांग रूम और आभूषण रखने के स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी और उनकी नियमित जांच भी होगी।

नकदी, आभूषण और कर्मचारियों के लिए भी सख्त व्यवस्था

निर्देशों के अनुसार दान की गिनती के बाद नकदी एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करनी होगी। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर मंदिर परिसर में बड़ी नकदी नहीं रखी जाएगी। सरकार ने अधिक बैंक खाते खोलने से बचने और एक ही अधिकृत बैंक खाते के उपयोग पर जोर दिया है। नकद दान, सोना, चांदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे और जहां संभव होगा, वहां डिजिटल लेखा प्रणाली अपनाई जाएगी। सभी बहुमूल्य वस्तुओं की सूची नियमित रूप से अद्यतन होगी। हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन और हर वर्ष सरकार द्वारा नामित समिति से वार्षिक सत्यापन कराया जाएगा। मंदिर अधिकारी हर महीने आंतरिक जांच करेंगे और जिला प्रशासन या विभाग औचक निरीक्षण भी कर सकेगा। नकदी संभालने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर बदलाव किया जाएगा। उनका और ठेका एजेंसियों के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। गिनती कक्ष में मोबाइल फोन, बैग या निजी सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम में डबल लॉक व्यवस्था, दो अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी, अलार्म प्रणाली और अग्नि सुरक्षा उपकरण भी अनिवार्य होंगे।

डिजिटल दान को बढ़ावा, 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

सरकार ने श्रद्धालुओं को यूपीआई, क्यूआर कोड, पीओएस मशीन और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से दान देने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। सभी डिजिटल दान सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में जमा होंगे। वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट मंदिर प्रबंधन समिति के समक्ष रखी जाएगी और जहां वेबसाइट उपलब्ध होगी, वहां तथा सूचना बोर्ड पर दान के उपयोग की जानकारी भी प्रदर्शित की जा सकेगी। चोरी, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, कमी या किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, उपायुक्त, कार्यपालक मजिस्ट्रेट, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग और राज्य सरकार को देनी होगी। सूचना छिपाने या देर से देने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। कार्यकारी अधिकारी और मंदिर प्रबंधन समितियों को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया गया है। नियमों की अनदेखी होने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सभी सरकारी स्वामित्व वाले और सरकार द्वारा प्रबंधित मंदिरों को 30 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज, ऑडिट, बहुमूल्य वस्तुओं की सूची, बैंकिंग व्यवस्था, कमियां और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। ये निर्देश अगले आदेश तक लागू रहेंगे और जिला मजिस्ट्रेट स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story