राज्यपाल ने किया टीबी-मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
मंडी, 07 अप्रैल (हि.स.)। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंडी जिले के सुंदरनगर स्थित दिव्य मानव ज्योति सेवा ट्रस्ट डैहर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत की परिकल्पना के अनुरूप सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राज्य ने प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
कविंद्र गुप्ता ने क्षय रोग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टीबी आज भी समाज में एक प्रमुख समस्या बनी हुई है, हालांकि राज्य इस बीमारी से निपटने में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में टीबी के मामलों की संख्या वर्ष 2022 में 15,760 से घटकर वर्ष 2025 में 14,653 हो गई है, जो स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों और समाज की सामूहिक भागीदारी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में ज्यादा जोखिम वाले लगभग 1.49 लाख व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से लगभग सात लाख 46 प्रतिशत लोगों की जांच एक्स-रे के माध्यम से की गई, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। उन्होंने कहा कि शिविरों में आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों और उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए निःशुल्क जांच की जा रही है, जबकि मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां दूरदराज और कठिन क्षेत्रों तक सेवाएं सुनिश्चित कर रही हैं।
राज्यपाल ने कहा कि टीबी-मुक्त ग्राम पंचायत पहल के तहत सामुदायिक प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। राज्य की 3,615 ग्राम पंचायतों में से 2023 में 731 20 प्रतिशत, 2024 में 823 -23 प्रतिशत और 2025 में 1,052 (29 प्रतिशत) पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया गया। उन्होंने इसे टीबी उन्मूलन की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक कदम बताया। राज्यपाल ने कहा कि 100 दिवसीय विशेष अभियान इस दिशा में एक निर्णायक पहल है। इसके तहत राज्य में 5,176 उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों की पहचान की गई है, जहां आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ऐसे लक्षित प्रयास राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं।
राज्यपाल ने सामुदायिक भागीदारी के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि क्षय रोग उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, इसे जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, आशा कार्यकर्ताओं और प्रत्येक नागरिक को टीबी उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 25 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। साथ ही ब्लॉक स्तर पर उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में काफी सुधार हुआ है।
राज्यपाल ने कहा कि लोक भवन की ओर से सभी मंत्रीगण, सांसदों और विधायकों को पत्र लिखकर टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने तथा उनके उपचार, पोषण और मानसिक सहयोग सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
श्री गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी द्वारा कोटली मेडिकल ब्लॉक के 75 टीबी मरीजों को गोद लिया गया है जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निक्षय मित्र के रूप में पंजीकरण कर विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

