हिमाचल में सरकारी नौकरी से पहले अभ्यर्थियों का होगा डोप टेस्ट

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हिमाचल में सरकारी नौकरी से पहले अभ्यर्थियों का होगा डोप टेस्ट


शिमला, 30 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने से पहले अब अभ्यर्थियों को डोप टेस्ट से गुजरना होगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सभी विभागों को निर्देश दिए कि सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों का डोप टेस्ट अनिवार्य करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार नशे, विशेषकर चिट्टा तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

चिट्टा तस्करी में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिए कि चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चिट्टा के खिलाफ जन आंदोलन शुरू किया है और नशा माफिया के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रशासन को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने होंगे।

सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लंबित भुगतान जल्द करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने बैठक में बजट घोषणा का उल्लेख करते हुए चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण राशि का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए। इसके अलावा विभागाध्यक्षों को करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों का पूरा विवरण उपलब्ध करवाने को कहा गया, ताकि प्रदेश सरकार इन मामलों पर उचित निर्णय ले सके। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से रिक्त पदों का ब्यौरा भी मांगा और कहा कि इन्हें जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) के 500 पद भरने का निर्णय ले चुकी है। बैठक में हाल ही में आए तूफान से वन भूमि पर गिरे और उखड़े पेड़ों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने वन विभाग को ऐसे पेड़ों का पूरा विवरण जुटाने और उन्हें हटाने के लिए 1 जून से विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गिरे हुए पेड़ों को समय पर नहीं हटाने से राज्य को संसाधनों की हानि होती है, इसलिए इनके शीघ्र निष्पादन और निस्तारण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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