आधुनिक तकनीक, जनभागीदारी और बेहतर समन्वय से ही हिमाचल बनेगा आपदा-सक्षम : मुख्य सचिव

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शिमला, 03 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा आने के बाद की जाने वाली प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत और समन्वित प्रक्रिया है। इसके लिए सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी तालमेल, संस्थागत व्यवस्थाओं की मजबूती, जनभागीदारी और आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से ही हिमाचल प्रदेश को अधिक सुरक्षित और आपदा-सक्षम बनाया जा सकता है।

मुख्य सचिव शिमला में शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) द्वारा आयोजित पोस्ट डिजास्टर रिव्यू सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हिमाचल को बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य सरकार, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सशस्त्र बलों, पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, जिला प्रशासन, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से जनहानि को कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक आपदा भविष्य की तैयारियों को और बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करती है। पूर्व की आपदाओं की समीक्षा से संचालन संबंधी कमियों की पहचान, संस्थागत क्षमता का आकलन तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को और प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

मुख्य सचिव ने आपदा रक्षक योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवकों का मजबूत नेटवर्क राहत दलों के पहुंचने से पहले खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी और जरूरतमंदों की सहायता में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने जिला स्तर पर संसाधन मानचित्रण और जीआईएस आधारित प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का त्वरित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सेमिनार में एनडीएमए के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्णा एस. वत्सा ने वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं के दौरान हिमाचल सरकार की तैयारियों और एसडीआरएफ की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने राज्य की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सेमिनार में एनडीएमए, एसडीएमए, एनडीआरएफ, सशस्त्र बलों, विभिन्न विभागों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए और आपदा पूर्व तैयारियों को सुदृढ़ बनाने के सुझाव दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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