डिग्री के साथ नौकरी का अनुभव, हर माह मिलेगा 10,900 रुपये स्टाइपेंड

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शिमला, 10 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अब डिग्री के साथ काम का व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का रास्ता खुल गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 16 राजकीय महाविद्यालयों में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम यानी एईडीपी शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री के साथ वास्तविक कार्यस्थल पर काम करने का अनुभव मिलेगा और अप्रेंटिसशिप की अवधि में उन्हें हर माह कम से कम 10,900 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलेगा।

इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग, कानपुर के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की मौजूदगी में बीओएटी-एनआर के निदेशक विवेक कुमार और 16 राजकीय महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एईडीपी का उद्देश्य कक्षा में मिलने वाली शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्योग और कार्यस्थल की जरूरतों के अनुसार कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा।

तीन उद्योग केंद्रित कार्यक्रमों से हुई शुरुआत

एईडीपी के तहत पांच पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी गई है। पहले चरण में तीन कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें बी.कॉम. बीएफएसआई 11 महाविद्यालयों, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट दो महाविद्यालयों और बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स तीन महाविद्यालयों में चलाया जा रहा है। पहले वर्ष में इन तीनों कार्यक्रमों में कुल 685 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विद्यार्थियों की पढ़ाई में शैक्षणिक अध्ययन के साथ कम से कम छह माह की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप शामिल होगी।

एईडीपी के तहत विद्यार्थी बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा, रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट तथा लॉजिस्टिक्स जैसे रोजगार से जुड़े क्षेत्रों में अध्ययन करेंगे। अप्रेंटिसशिप के दौरान विद्यार्थियों को न्यूनतम 10,900 रुपये प्रतिमाह का सुनिश्चित स्टाइपेंड मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को डिग्री हासिल करने के साथ कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और उद्योग की जरूरत के अनुसार अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।

21 कॉलेजों में चल रहे बी.वॉक कार्यक्रमों का भी विस्तार

प्रदेश के 21 राजकीय महाविद्यालयों में रिटेल मैनेजमेंट तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी में बी.वॉक कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बेहतर प्लेसमेंट परिणामों को देखते हुए इनका विस्तार 25 और महाविद्यालयों तक करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार मिलने को कौशल आधारित उच्च शिक्षा के बढ़ते अवसरों के तौर पर देखा जा रहा है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि बीओएटी-एनआर के साथ समझौते से उद्योगों के साथ संबंध मजबूत होंगे। इससे विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, उद्योग केंद्रित कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण रहेगा। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य और बीओएटी-एनआर के पदाधिकारी मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद हिमाचल तीसरा राज्य

हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद देश का तीसरा राज्य है, जहां इस तरह के डिग्री कार्यक्रम लागू किए गए हैं। एईडीपी को लेकर विद्यार्थियों से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले वर्षों में इन कार्यक्रमों का विस्तार और अधिक राजकीय महाविद्यालयों तक करने की योजना है। इसके साथ ही बीए और बीएससी जैसे अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में भी अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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