प्रदेश का यह सबसे निराशाजनक बजट, जनता और कर्मचारी दोनों हताश : जयराम ठाकुर

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प्रदेश का यह सबसे निराशाजनक बजट, जनता और कर्मचारी दोनों हताश : जयराम ठाकुर


शिमला, 22 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शनिवार को विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2026–27 के बजट पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि इस बजट को लेकर न केवल आम जनता में बल्कि कांग्रेस नेताओं के भीतर भी कोई उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक और दिशाहीन बजट बताया।

जयराम ठाकुर ने रविवार को एक बयान में कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में विधानसभा में लगातार 29 बजट प्रस्तुत होते देखे हैं, लेकिन इस तरह का नीरस और बिना स्पष्ट दिशा वाला बजट पहले कभी नहीं देखा। उनका कहना है कि इस बजट से प्रदेश की जनता निराश है और लोगों को अब यह पछतावा हो रहा है कि उन्होंने सत्ता ऐसे दल को दी, जिसकी नीतियों के कारण प्रदेश विकास की रफ्तार से पीछे चला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर बनी वर्तमान सरकार लोगों को सुविधाएं देने के बजाय उनसे सुविधाएं छीनने का काम कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद सरकार ने पिछली सरकार के समय बनाए गए 2000 से अधिक संस्थान बंद कर दिए और अब जनहित योजनाओं के बजट तथा कर्मचारियों के वेतन पर भी असर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया अब ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे बजट भाषण के दौरान उनका रवैया अहंकार से भरा नजर आया। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की मेहनत को नजरअंदाज किया गया और पूरा श्रेय खुद लेने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बजट में विकास के नाम पर जो घोषणाएं की गई हैं, उनमें से अधिकतर केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से ही संभव होंगी, चाहे वह सड़कों के निर्माण की बात हो या नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि।

प्रदेश की वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के फैसलों के कारण कर्मचारी वर्ग निराश और हताश है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकारी खजाना “रेवड़ियां बांटने” में खर्च कर दिया गया और अब वित्तीय स्थिति सुधारने के नाम पर अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन में देरी जैसे फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बजट से न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के कई विधायक भी संतुष्ट नहीं दिखे और सदन का माहौल भी यही संकेत दे रहा था।

केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि राज्य सरकार ने कोई नई मौलिक योजना शुरू करने के बजाय केंद्र की योजनाओं को नया नाम देकर पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने इसे जनता के साथ धोखा बताया। आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अनावश्यक टैक्स लगाए गए हैं और चुनाव से पहले किए गए 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं को 1500 रुपये देने के वादों पर अब कड़ी शर्तें लगा दी गई हैं, जिससे कम लोगों को ही लाभ मिल पा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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